

आसनसोल : हटन रोड मोड़ स्थित सिटी बस स्टैंड पर गुरुवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के प्रतिवाद में ‘तहफ़्फ़ुज़‑ए‑वक्फ’ कमेटी ने विशाल जनसभा का आयोजन किया। सभा में आसनसोल‑दुर्गापुर के इमाम‑उलेमा के साथ बिहार‑झारखंड से आए वक्ताओं ने भी भाग लिया। कार्यक्रम का आरम्भ कश्मीर के हालिया आतंकी हमले में मृत 26 पर्यटकों को मौन‑प्रार्थना द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया।
वक्फ कानून पर आपत्तियाँ
कानूनी विशेषज्ञ शेखर कुंडू ने संबोधन में कहा, “वक्फ संपत्ति ‘अल्लाह की अमानत’ अर्थात देवत्तरी संपदा मानी जाती है, जिसकी खरीद‑फरोख्त असंवैधानिक है। संशोधन अधिनियम में वक्फ बोर्ड में गैर‑मुस्लिम सदस्यों की अनिवार्य नियुक्ति, कलेक्टर को अधिग्रहण सर्वे सर्वसत्ताधिकार और न्यायाधिकरण के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती जैसे प्रावधान वक्फ स्वायत्तता पर कुठाराघात हैं।” उनका आरोप था कि दस्तावेज़‑विहीन मस्जिद, कब्रिस्तान या मदरसा भूमि को ‘सरकारी’ घोषित कर अधिग्रहण का मार्ग प्रशस्त किया गया है।
इमाम मुफ्ती जुबैर काश्मी ने कहा, “यह केवल मुस्लिम हित पर चोट नहीं; संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता पर क्रमिक प्रहार है। यदि आज वक्फ अधिकार कमज़ोर पड़े, तो कल अन्य धर्मों की पूजा‑स्थली भी असुरक्षित होंगी। अतः यह लड़ाई सम्पूर्ण भारतीय समाज के बहुलवादी चरित्र को बचाने की लड़ाई है।”

राष्ट्रीय आंदोलन का आह्वान
तहफ़्फ़ुज़‑ए‑वक्फ कमेटी के प्रतिनिधियों ने ऐलान किया कि संशोधन निरस्त होने तक देश‑व्यापी शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा। वक्ताओं ने सभी धर्मावलम्बियों से संविधानिक मूल्य‑रक्षा हेतु कंधे से कंधा मिलाकर चलने की अपील की। सभा‑मंच से “वक्फ क़ानून वापस लो”, “संविधान बचाओ‑भारत बचाओ” जैसे नारे गूंजे।

सभागत अनुशासन
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन पूर्णतः अहिंसक रहेगा। स्थल पर तैनात पुलिस‑बल के साथ समन्वय कर यातायात व्यवधान न्यूनतम रखा गया। अंत में प्रस्ताव पारित हुआ कि: केंद्र सरकार संशोधित अधिनियम की विवादित धाराएँ हटाए। वक्फ बोर्डों की स्वायत्तता यथावत रखी जाए। धार्मिक संपत्ति के सर्वेक्षण हेतु उच्चस्तरीय संयुक्त समिति गठित हो।

सामाजिक‑राजनीतिक निहितार्थ
विश्लेषकों का मानना है कि वक्फ विवाद ने आगामी स्थानीय निकाय एवं आम चुनावों में अल्पसंख्यक‑मतदाताओं की भूमिका को पुनः केन्द्रीय मुद्दा बना दिया है। सभा ने स्पष्ट कर दिया कि यदि संवाद और पारदर्शिता न बरती गई, तो विरोध तीव्रतर रूप ले सकता है।
अंततः संयोजक फ़ैज़ अनवर ने कहा, “हम संविधानसम्मत मार्ग से अपनी संपदा और अधिकारों की हिफ़ाज़त करेंगे। सरकार सुने या न सुने, न्याय के लिए हमारी मुहिम थमेगी नहीं।”














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