

आसनसोल : रानीगंज खनन क्षेत्र में दुर्लभ धारीदार लकड़बग्घे (हुर्रा) के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग ने पशु‑कल्याण स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से विशेष पहल शुरू की है। हाल के सप्ताहों में चुरुलिया, जमुरिया तथा दुर्गापुर परिक्षेत्र से इस प्रजाति के चार मृत शरीर बरामद हुए थे, जिन पर चोट के स्पष्ट चिह्न पाए गए। प्रारंभिक आँकड़ों से संकेत मिलता है कि भयवश अथवा अज्ञानवश स्थानीय लोगों द्वारा उन पर आक्रमण किया गया। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की पहली अनुसूची में सूचीबद्ध इस निशाचर मांसाहारी प्रजाति की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है।

दुर्गापुर वन प्रभागीय पदाधिकारी अनुपम खान ने बताया, “वन विभाग नियमित जन‑जागरूकता अभियान चला रहा है — विविध पंचायत क्षेत्रों में पोस्टर, जनसभाएँ तथा ऑडियो‑विजुअल प्रदर्शन के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि लकड़बग्घे मानव अथवा पालतू पशुओं को हानि नहीं पहुँचाते; वे प्राकृतिक सफाईकर्मी हैं, मृत पशु‑शवों को खाकर पर्यावरण संतुलित रखते हैं।” चुरुलिया‑सामड़ी‑सागरभंगा बेल्ट के नवीन सर्वेक्षण में पाँच वयस्क लकड़बग्घे चुरुलिया में, दो सामड़ी में तथा अनिश्चित संख्या सागरभंगा में दर्ज की गई। लगातार घटती उपस्थिति ने संरक्षण‑प्रेमियों को चिंतित कर दिया है।

एनजीओ ‘वाइल्डलाइफ़ केयर’ के संयुक्त सचिव मनीष चट्टोपाध्याय ने बताया, “लकड़बग्घे की यह जाति स्वभावतः संकोची है। भोजनाभाव के कारण यदि ये बस्तियों की ओर भटक आएँ तो शांत रहकर वन विभाग को सूचित करें, कदापि हमला न करें।” संस्था द्वारा गाँव‑स्तरीय कार्यशालाओं में विद्यार्थियों तथा खनिकों को ‘मानव‑वन्यजीव सहजीवन’ विषय पर प्रशिक्षित किया जा रहा है।
खनन पट्टों में अनियमित कचरा‑निपटान और मृत पशु‑फेंकाव लकड़बग्घों को आकर्षित करता है। विभाग ने ठेकेदारों को निर्देशित किया है कि वे सुरक्षित लैंडफिल की व्यवस्था सुनिश्चित करें तथा रात्रिकालीन गश्त बढ़ाएँ। साथ ही, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की टीम संभावित शिकार या अवैध व्यापार कोण की भी जाँच कर रही है।

वन विभाग का विश्वास है कि सामुदायिक भागीदारी, वैज्ञानिक निगरानी तथा कड़ी विधि‑प्रवर्तन से इस पर्यावरण‑हितैषी प्रजाति को संरक्षित किया जा सकेगा। क्षेत्रवासियों से अपील की गई है कि यदि कहीं लकड़बग्घा दिखे या घायल अवस्था में मिले, तो तुरंत टोल‑फ्री नंबर 1926 पर सूचना दें।














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