

दुर्गापुर : एबीएल कारखाना, जो अब जी वरनोवा इंडस्ट्री के नाम से जाना जाता है, इन दिनों अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को लेकर विवादों में घिरा हुआ है। वर्षों से एबीएल टाउनशिप के आवासों में रह रहे इन पूर्व कर्मचारियों को कारखाना प्रबंधन द्वारा अचानक निष्कासन का नोटिस थमा दिया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में उथल-पुथल मच गई है।
तृणमूल श्रमिक संगठन आईएनटीटीयूसी इस नोटिस का विरोध करते हुए खुलकर सामने आया है और कहा है कि यह निष्कासन गैरकानूनी है तथा किसी भी स्थिति में इसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। शुक्रवार शाम को आईएनटीटीयूसी द्वारा एबीएल टाउनशिप में एक बड़ी विरोध सभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मचारी शामिल हुए।

विरोध सभा में मुख्य अतिथि के रूप में पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री प्रदीप मजूमदार उपस्थित रहे। उनके साथ आईएनटीटीयूसी के जिला अध्यक्ष अभिजीत घटक और श्रमिक नेता दीपंकर लाहा भी मंच पर मौजूद थे। सभा के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को निवास स्थान से जबरन हटाना अन्यायपूर्ण और अमानवीय है।

अभिजीत घटक ने कहा, “जब कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दी गई थी, उसी समय उन्हें आवास में रहने की अनुमति दी गई थी, जिसके लिए वे नियमित रूप से मेंटनेंस और लीज शुल्क का भुगतान करते आ रहे हैं। यह न सिर्फ़ कानूनी अनुबंध का उल्लंघन है बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों के खिलाफ़ भी है।” उन्होंने आगे कहा कि तृणमूल कांग्रेस और उसका श्रमिक संगठन पूर्ण रूप से इन वरिष्ठ नागरिकों के साथ खड़ा है और न्याय दिलाने तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
सभा में उपस्थित सैकड़ों सेवानिवृत्त कर्मचारी, जिनमें से कई पिछले 30 से 40 वर्षों से इस टाउनशिप में रह रहे हैं, काफी भावुक दिखे। उनका कहना है कि वे अपने जीवन की अंतिम सांसे यहीं बिताना चाहते हैं, और अब अचानक बेघर होने का खतरा उनके लिए मानसिक आघात बन चुका है।

इस मुद्दे ने न केवल श्रमिकों के भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि कारखाना प्रशासन की संवेदनशीलता पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।














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