

आसनसोल : पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा उद्योगों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) बंद करने के हालिया फैसले ने राज्य के औद्योगिक और कारोबारी जगत में हलचल मचा दी है। खासकर एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) क्षेत्र के लिए यह निर्णय चिंता का विषय बन गया है। दक्षिण बंगाल के सबसे बड़े वाणिज्यिक संगठन फेडरेशन ऑफ साउथ बंगाल चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FOSBECCI) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को खुला पत्र लिखकर इस फैसले का विरोध दर्ज कराया है।

राज्य सरकार का मानना है कि वर्तमान में बंगाल में उद्योगों के अनुकूल माहौल तैयार हो गया है, इसलिए निवेशकों को अतिरिक्त प्रोत्साहन की आवश्यकता नहीं रह गई है। लेकिन FOSBECCI का तर्क है कि यह फैसला राज्य के औद्योगिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा, खासकर उन क्षेत्रों पर जहां पहले से ही उद्योग-ढांचा कमजोर है, जैसे कि पश्चिमी बंगाल का आसनसोल क्षेत्र।FOSBECCI के प्रतिनिधियों का कहना है कि इंसेंटिव न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करता है, बल्कि नए निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत भी होता है। संगठन ने अपने पत्र में लिखा है, “अगर यह सहायता हटा दी गई, तो निवेशकों का रुझान झारखंड और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों की ओर बढ़ जाएगा, जहां उद्योगों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।”स्थानीय उद्योगपति राकेश शाह ने इस संदर्भ में कहा, “उद्योग वहीं बढ़ते हैं जहां उन्हें सहूलियत मिलती है।

अगर यहां सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तो निवेशक अन्य राज्यों की ओर रुख करेंगे। इससे पश्चिम बंगाल विशेषकर आसनसोल जैसे औद्योगिक क्षेत्रों का विकास थम जाएगा।”गौरतलब है कि एमएसएमई सेक्टर के लिए इंसेंटिव आर्थिक जीवनरेखा की तरह कार्य करता है।

उद्योग लगाने में पहले ही भारी लागत आती है, ऐसे में इंसेंटिव हटना निवेश को हतोत्साहित कर सकता है। पूर्वी बंगाल की तुलना में पश्चिमी इलाकों में पहले ही औद्योगिक विकास की गति धीमी है।FOSBECCI ने मुख्यमंत्री से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की है ताकि एमएसएमई और नए निवेशकों को प्रोत्साहन मिलता रहे और राज्य में औद्योगिक विकास की रफ्तार बनी रहे।














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