

रानीगंज : आसनसोल नगर निगम के वार्ड संख्या 35 के अंतर्गत आने वाले रोनाई इलाके के अहमदनगर निवासी मोहम्मद अत्ताउल के परिजन और पड़ोसी मंगलवार को सड़क पर उतर आए। बीते 9 मई को पंजाबी मोड़ इलाके में एक मिनी बस द्वारा टक्कर मारे जाने के बाद गंभीर रूप से घायल मोहम्मद अत्ताउल वर्तमान में दुर्गापुर के एक निजी अस्पताल में जीवन-मृत्यु से जूझ रहे हैं, और उनके परिजनों ने इलाज में हो रही आर्थिक परेशानी को लेकर नया बस स्टैंड के पास लगभग दो घंटे तक सड़क जाम किया।
इस सड़क जाम के कारण बसों का आवागमन पूरी तरह से बाधित रहा और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हादसे के समय बस एसोसिएशन के सदस्यों और बस मालिकों ने इलाज का पूरा खर्च उठाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब वे न तो फोन उठा रहे हैं और न ही कोई मदद कर रहे हैं।
मोहम्मद अत्ताउल की मां ने मीडिया से बातचीत में भावुक होकर कहा कि “हमें पैसे नहीं चाहिए, हमें बस हमारा बेटा चाहिए। इलाज के लिए अब तक ढाई लाख रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन बस एसोसिएशन की ओर से केवल बीस हजार रुपये देने की बात कही गई है, जो बहुत बड़ा अन्याय है।”

प्रदर्शन में शामिल स्थानीय लोगों ने बताया कि मोहम्मद अत्ताउल एक मेहनतकश युवक हैं, जिनका एक साल पहले ही विवाह हुआ था और उनकी उम्र केवल 26 वर्ष है। इस हादसे ने उनके परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि बस संगठनों की संवेदनहीनता और वादाखिलाफी गरीबों के जीवन के साथ खिलवाड़ है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद वार्ड 35 की पार्षद अख्तरी खातून मौके पर पहुंचीं और उन्होंने पीड़ित परिवार को पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया। पार्षद ने कहा, “यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। शुरू में बस मालिकों ने इलाज का खर्च वहन करने की बात कही थी, लेकिन अब मुंह मोड़ लिया गया है, जो अमानवीय है।”
पार्षद ने यह भी जानकारी दी कि उन्होंने इस मामले में आईएनटीटीयूसी के जिला अध्यक्ष अभिजीत घटक से संपर्क कर एक बैठक बुलाने की बात की है। इस बैठक में बस मालिकों से अनुरोध किया जाएगा कि वे पीड़ित को न्याय और आर्थिक सहायता प्रदान करें।
स्थानीय लोगों की मांग है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह की पीड़ा से न गुजरना पड़े। सड़क जाम दोपहर करीब एक बजे समाप्त हुआ, जब प्रशासन और पुलिस के हस्तक्षेप से प्रदर्शनकारी शांत हुए और उचित कार्रवाई का आश्वासन पाकर लौटे।

तेज आंधी से मेजिया विद्युत केंद्र में हादसा, दो श्रमिकों की मौत

बांकुड़ा : मेजिया ताप विद्युत केंद्र में निर्माणाधीन चिमनी के पास देर शाम आई तेज आंधी ने एक दर्दनाक हादसे को जन्म दे दिया। इस हादसे में दो श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा उस समय हुआ जब तेज तूफान से बचने के लिए कुछ श्रमिक एक टिन शेड के नीचे शरण ले रहे थे और उसी दौरान निर्माणाधीन चिमनी से एक भारी लोहे का अस्थायी ढांचा टूटकर उनके ऊपर गिर पड़ा।

मेजिया ताप विद्युत परियोजना में एक नया प्रदूषण नियंत्रण चिमनी बनाया जा रहा है। इस कार्य की जिम्मेदारी एक निजी ठेका कंपनी को सौंपी गई है। निर्माण कार्य के तहत श्रमिक चिमनी के लगभग 100 मीटर ऊपर एक लोहे का अस्थायी प्लेटफॉर्म तैयार कर रहे थे। उसी दौरान अचानक मौसम ने करवट ली और तेज हवाओं के साथ आंधी शुरू हो गई। सुरक्षा के अभाव में चिमनी पर कार्यरत छह श्रमिक नीचे उतर आए और पास ही स्थित एक टिन शेड के नीचे शरण ली।

इसी दौरान तेज हवा के झोंकों से ऊपर लगे लोहे के प्लेटफॉर्म का एक बड़ा हिस्सा असंतुलित होकर नीचे गिर पड़ा और सीधे उस टिन शेड पर जा गिरा जहां श्रमिक शरण लिए हुए थे। भारी भरकम लोहे की संरचना गिरते ही शेड पूरी तरह से ढह गया और उसके नीचे दबकर दो श्रमिकों की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। वहीं, एक अन्य श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद दुर्गापुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मृतकों की पहचान उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के निवासी प्रेम शंकर और कंवरपाल के रूप में हुई है। घायल श्रमिक की स्थिति भी गंभीर बताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही गंगाजलघाटी थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए बांकुड़ा सम्मेलनी मेडिकल कॉलेज भेज दिया।
घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। साथी श्रमिकों में आक्रोश व्याप्त हो गया। उन्होंने काम बंद कर प्रदर्शन करते हुए कंपनी प्रबंधन से मृतकों के परिवार को उचित मुआवजा देने और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने की मांग की।

स्थानीय प्रशासन ने भी इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार अथवा प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मृतकों के परिजनों को सरकारी प्रावधानों के तहत सहायता देने की भी बात कही गई है।
यह हादसा एक बार फिर से यह सवाल खड़ा करता है कि बड़ी परियोजनाओं में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा के लिए क्या पर्याप्त उपाय किए जा रहे हैं? जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर श्रमिक संगठनों ने भी आवाज बुलंद की है।













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