
आसनसोल : आसनसोल रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ, जीआरपी और गैर सरकारी संगठन ‘पराजक’ की संयुक्त विशेष जांच अभियान के तहत जसीडीह-ताम्बरम एक्सप्रेस ट्रेन से 25 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित उतारा गया। सभी बच्चों की उम्र 18 वर्ष से कम बताई जा रही है और इन्हें झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों से काम करवाने की मंशा से चेन्नई ले जाया जा रहा था।
सूत्रों के अनुसार, गुप्त सूचना के आधार पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), जीआरपी और एनजीओ पराजक ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ट्रेन की तलाशी ली। इस दौरान संदेह के आधार पर 25 बच्चों को उतारा गया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि इन बच्चों को संभवतः बाल श्रम के उद्देश्य से चेन्नई ले जाया जा रहा था।

बच्चों को जीआरपी थाना लाया गया है, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। साथ ही उनके आधार कार्ड की जांच के जरिए उनकी पहचान और आयु सत्यापित की जा रही है। फिलहाल सभी बच्चों को सुरक्षित रखा गया है और उनके परिजनों को सूचित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन बच्चों को कौन लोग ले जा रहे थे और इनके पीछे कौन-से दलाल या एजेंसियां सक्रिय हैं। यह भी संदेह है कि यह कोई संगठित मानव तस्करी रैकेट हो सकता है, जो झारखंड जैसे गरीब इलाकों से बच्चों को बहला-फुसलाकर या लालच देकर बड़े शहरों में ले जाकर उनसे श्रम कराता है।

एनजीओ पराजक के सदस्यों ने बच्चों की मानसिक स्थिति की जांच कर उन्हें काउंसलिंग भी प्रदान की है। उनका कहना है कि इस प्रकार के मामलों में बच्चों को लंबे समय तक मानसिक आघात झेलना पड़ता है, जिससे उन्हें उबरने के लिए विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।

रेलवे पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और इसमें शामिल दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि बाल तस्करी जैसे संगीन अपराध अभी भी समाज में व्याप्त हैं और इनसे निपटने के लिए सतर्कता और सख्ती दोनों आवश्यक हैं।














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