
अंडाल : रेलवे की जमीन पर वर्षों से व्यवसाय कर रहे लघु व्यापारियों ने अंडाल रेलवे प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उनकी मांग है कि जब तक उन्हें वैकल्पिक जगह पर पुनर्वास नहीं दिया जाता, वे अपनी दुकानें खाली नहीं करेंगे। इसी उद्देश्य से लघु व्यापारी संघ के बैनर तले अंडाल रेलवे स्टेशन परिसर से अंडाल डाकघर तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला गया।

इस मार्च का नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता आदित्य रॉय ने किया, जिसमें बड़ी संख्या में व्यापारी, स्थानीय नागरिक और राजनीतिक नेता शामिल हुए। प्रमुख नेताओं में रूपेश यादव, रॉबिन मिश्रा और दयामय मंडल का नाम प्रमुख रहा। इन नेताओं ने व्यापारियों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि रेलवे विकास के नाम पर गरीबों की आजीविका नहीं छीन सकता।
प्रदर्शनकारी व्यापारियों ने रेलवे प्रशासन पर बार-बार नोटिस भेजकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि वे रेलवे की जमीन पर जब तक पुनर्वास की उचित व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक दुकानें खाली नहीं करेंगे।

व्यापारियों में शामिल जवा सरकार ने कहा, “हम रेलवे की जमीन खाली करने को तैयार हैं, लेकिन पहले हमें वैकल्पिक जगह दी जाए, जहां हम फिर से व्यापार शुरू कर सकें। हमारे लिए दुकानें ही जीवन का आधार हैं, इन्हीं से हमारा परिवार चलता है।”
व्यापारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन रेलवे प्रशासन को गरीब परिवारों की आजीविका का भी ख्याल रखना चाहिए।

मार्च के अंत में व्यापारियों ने रेलवे प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और मांग की कि उन्हें जल्द से जल्द पुनर्वास योजना के तहत समुचित स्थान उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

अंडाल क्षेत्र में यह मामला अब सामाजिक और राजनीतिक रूप लेता जा रहा है, और सभी की नजरें रेलवे प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।














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