
आसनसोल : पश्चिम बंगाल में शिक्षक नियुक्ति (SSC) प्रकरण को लेकर राजनीतिक तापमान एक बार पुनः चरम पर पहुँच गया है। तृणमूल कांग्रेस के राज्य संपादक वी. शिवदासन दासु ने आज सोशल मीडिया पर सजीव प्रसारण के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी एवं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी पर तीखा प्रहार किया।

दासु ने गहन खेद व्यक्त करते हुए कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेश के पश्चात् लगभग 26,000 शिक्षकों की नियुक्ति निरस्त हो जाना अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसके लिए प्रत्यक्षतः भाजपा एवं माकपा को उत्तरदायी ठहराया। उन्होंने कहा कि वाममोर्चा शासनकाल में एक बड़ी संख्या में माकपा समर्थकों की प्राथमिक शिक्षक पद पर नियुक्तियाँ हुईं, जिनमें से कई के पास वांछनीय शैक्षिक योग्यताएँ भी नहीं थीं।

उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या उन सभी नियुक्त कर्मियों ने उचित पात्रता अर्जित की थी? क्या उन्हें केवल माकपा की सदस्यता एवं जनगणना कार्य में सहभागिता के आधार पर नियुक्त नहीं किया गया था? तथापि, जब 2011 में सत्ता परिवर्तन हुआ और ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आई, तब उन्होंने उन माकपा समर्थक शिक्षकों की सेवाओं को निरस्त नहीं किया।
दासु ने यह स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी प्रारम्भ से ही ‘बदले’ की नहीं, ‘बदलाव’ की पक्षधर रही हैं, अतः उन्होंने प्रतिशोध की राजनीति से स्वयं को पृथक रखा। उन्होंने कहा कि माकपा के विकास रंजन भट्टाचार्य ने भाजपा की ‘बी-टीम’ की भाँति कार्य करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में ऐसा वाद प्रस्तुत किया, जिसके परिणामस्वरूप हजारों योग्य व निर्धन परिवारों से आने वाले शिक्षकों की जीविका छिन गई।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि सीबीआई द्वारा निष्पक्ष विवेचना की गई होती, तो रिश्वत के आधार पर नियुक्त कर्मियों की पहचान की जा सकती थी और केवल दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाती। किंतु समस्त नियुक्तियाँ रद्द करना न्यायोचित नहीं है।
दासु ने चेतावनी दी कि बंगाल की जागरूक जनता इस अन्याय को न भूलेगी और भाजपा एवं माकपा को आगामी चुनावों में उत्तरदायित्व का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने अधीर रंजन चौधरी को भी आड़े हाथों लिया और उन्हें अवसरवादी दलाल निरूपित करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस, वामपंथ एवं भाजपा की मिलीभगत से तृणमूल कांग्रेस की छवि को धूमिल करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।

उन्होंने विश्वासपूर्वक कहा कि ममता बनर्जी ही एकमात्र नेता हैं, जो आज भी भारतीय जनता पार्टी के समक्ष निर्भीकता से खड़ी हैं, और आगामी 2026 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस और भी प्रचण्ड बहुमत से पुनः सत्ता में वापसी करेगी।














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