
आसनसोल : शिक्षक चयन आयोग (एसएससी) से सम्बद्ध नियुक्ति प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 26,000 शिक्षकों की नियुक्ति निरस्त किए जाने के परिप्रेक्ष्य में तृणमूल कांग्रेस के राज्य महासचिव वी. शिवदासन दासु ने विपक्षी दलों भारतीय जनता पार्टी एवं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी पर तीव्र शब्दों में प्रहार किया।
दासु ने सोशल मीडिया मंच के माध्यम से लाइव संबोधन में निर्णय को बंगाल विरोधी षड्यंत्र निरूपित करते हुए सीधे तौर पर माकपा एवं भाजपा को इसके लिए उत्तरदायी ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों की मिलीभगत से न्यायालय के समक्ष एकपक्षीय तथ्यों को प्रस्तुत कर शिक्षकों के भविष्य को अंधकारमय बना दिया गया।

उन्होंने वाम शासन काल में की गई नियुक्तियों पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि उस समय माकपा कार्यकर्ताओं को प्राथमिक शिक्षक पदों पर नामांकित किया गया था, चाहे उनके पास आवश्यक योग्यता हो या न हो। दासु ने यह भी स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी ने सत्ता में आने के उपरांत वाम समर्थक शिक्षकों को हटाने की बजाय उन्हें कार्यरत रखा, क्योंकि वे ‘बदले नहीं, बदलाव’ की पक्षधर हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा समर्थित अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने न्यायालय में जिस प्रकार से पक्ष रखा, वह शिक्षकों की आजीविका पर कुठाराघात है। दासु ने यह भी जानना चाहा कि यदि सभी नियुक्तियाँ रिश्वत के बल पर हुई थीं, तो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कितनों को दोषी सिद्ध किया? यदि कुछ पर संदेह था तो उन्हें हटाया जा सकता था, न कि समस्त 26,000 को।

दासु ने चेताया कि इस निर्णय से अनेक निर्धन परिवारों का जीवन संकट में पड़ गया है। उन्होंने इसे ‘न्याय की आड़ में अन्याय’ की संज्ञा दी। साथ ही कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को ‘दलाल’ निरूपित करते हुए कहा कि वाम-कांग्रेस गठजोड़ ने स्वयं को राजनीति के हाशिये पर ला खड़ा किया है।

दासु ने ममता बनर्जी को एकमात्र नेता बताया जो भाजपा के विरुद्ध निर्भीकता से संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि टीएमसी आगामी 2026 के विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से पुनः सत्ता में वापसी करेगी।
दासु के इस प्रहार के पश्चात् बंगाल की राजनीति में तीव्र हलचल उत्पन्न हो गई है।














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