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संविधान दिवस पर प्रधानमंत्री की अपील—कर्तव्य निभाकर राष्ट्र सशक्त बनाएं

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कोलकाता  : बुधवार को संविधान दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी विशेष पत्र पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर को न केवल संवैधानिक मूल्यों के स्मरण का अवसर बताया, बल्कि नागरिक कर्तव्यों को राष्ट्रीय निर्माण की आधारशिला के रूप में सामने रखा। प्रधानमंत्री का यह संदेश विशेष रूप से युवाओं, नए मतदाताओं और देश के भविष्य को आकार देने वाली पीढ़ी को ध्यान में रखकर लिखा गया माना जा रहा है।

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प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में उल्लेख किया कि संविधान केवल एक विधिक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का प्रतीक है। उन्होंने 26 नवंबर 1949 को संविधान के ऐतिहासिक अंगीकरण को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास की निर्णायक घड़ी कहा। वर्ष 2015 में इस तिथि को संविधान दिवस घोषित किए जाने का उद्देश्य भी इसी भावना को जन-जन तक पहुँचाना था।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि 2014 में संसद की सीढ़ियों को नमन करना और 2019 में संविधान की प्रति को माथे से लगाना उनके जीवन के अविस्मरणीय क्षण रहे। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान साधारण परिवार से आने वाले किसी भी व्यक्ति को देश के सर्वोच्च पदों तक पहुँचने की राह दिखाता है—यह संविधान की असली ताकत है।

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उन्होंने संविधान सभा के महान निर्माताओं—डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. भीमराव आंबेडकर, पुरुषोत्तमदास टंडन और अन्य महिला सदस्यों के योगदान को भी नमन किया। प्रधानमंत्री ने लिखा कि संविधान गौरव यात्रा और संसद के विशेष सत्रों में जनता की भारी भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि देश संविधान को गर्व के साथ अपनाता है।

इस वर्ष का संविधान दिवस कई ऐतिहासिक अवसरों के साथ जुड़ा है—सरदार वल्लभभाई पटेल और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, वंदे मातरम के 150 वर्ष, तथा गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहादत वर्षगांठ। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सभी प्रसंग हमें अनुच्छेद 51A में बताए गए कर्तव्यों की याद दिलाते हैं—क्योंकि राष्ट्र निर्माण अधिकारों की अपेक्षा कर्तव्यों के पालन से होता है। उन्होंने महात्मा गांधी के कथन का हवाला देते हुए कहा कि कर्तव्यों से ही अधिकारों की प्राप्ति सुनिश्चित होती है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि 2049—जब संविधान को अंगीकृत हुए 100 वर्ष पूरे होंगे—एक नए भारत की रूपरेखा प्रस्तुत करने का अवसर होगा। आज देश जिन नीतियों का निर्माण कर रहा है, वे अगले कई दशकों तक भारत के भविष्य का आधार बनेंगी। इसलिए युवाओं और नए मतदाताओं को जागरूक और सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

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प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि देशभर के स्कूलों और कॉलेजों में 18 वर्ष पूर्ण कर चुके नए मतदाताओं को सम्मानित करने की परंपरा शुरू की जाए। इससे युवाओं में लोकतांत्रिक जिम्मेदारी और गर्व की भावना मज़बूत होगी। उन्होंने कहा कि मतदान केवल अधिकार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दायित्व भी है।

अंत में प्रधानमंत्री ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे संविधान में बताए गए कर्तव्यों को जीवन का आधार बनाएं, जिम्मेदार नागरिक बनकर देश को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाएँ और आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत लोकतांत्रिक विरासत छोड़ें।

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