
दुर्गापुर : पश्चिम बर्दवान जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में अवैध बालू खनन एक बार फिर गहराते संकट का रूप ले चुका है। राज्य की मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता ने संदेह को जन्म दिया है कि क्या प्रशासनिक तंत्र बालू माफियाओं के समक्ष नतमस्तक हो गया है?
गत दिनों अंडाल प्रखंड के श्रीरामपुर बालू घाट में बेलगाम रूप से बालू उत्खनन की घटनाओं ने पर्यावरण प्रेमियों के साथ-साथ ‘भूमि रक्षक समिति’ को भी पुनः आंदोलित कर दिया है। समिति के प्रमुख ध्रुवज्योति मुखोपाध्याय के नेतृत्व में समिति ने मंगलवार को उप-मंडलाधिकारी को एक विस्तृत स्मारपत्र सौंपते हुए प्रशासनिक उदासीनता के विरुद्ध आवाज़ बुलंद की।

स्मारपत्र में उल्लेख किया गया कि विगत १२ मार्च को ही समिति द्वारा उप-मंडल प्रशासन को अवैध बालू उत्खनन पर रोक लगाने हेतु निवेदन किया गया था, जिसके उपरांत प्रशासन की ओर से एक दिशा-निर्देश जारी किया गया। किंतु व्यावहारिक धरातल पर उसकी कोई छाया नहीं दिखी। बालू माफियाओं द्वारा खुलेआम बालू की लूट बदस्तूर जारी है।

समिति ने आरोप लगाया है कि प्रशासन और पुलिस के कुछ वर्गों की मिलीभगत के कारण ही यह धंधा दिनदहाड़े फलफूल रहा है। इतना ही नहीं, जो भी इस अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाता है, उसे झूठे मामलों में फँसाकर प्रताड़ित किया जाता है। गत १९ मार्च को पर्यावरण की रक्षा हेतु किए गए शांतिपूर्ण आंदोलन पर पुलिस की बर्बरता इसी साजिश की कड़ी मानी जा रही है।
ध्रुवज्योति मुखोपाध्याय ने कहा कि भूमि, जल एवं पर्यावरण की रक्षा हेतु यदि प्राण की आहुति भी देनी पड़ी, तो पीछे नहीं हटेंगे। माफिया-प्रशासन गठजोड़ के विरुद्ध संघर्ष जारी रहेगा।

वहीं, सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि कोई भी अवैध कार्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी, भले ही वे किसी भी राजनैतिक दल से जुड़े क्यों न हों।

किन्तु यक्ष प्रश्न यही है कि जब-जब शिकायतें होती हैं, तब-तब प्रशासनिक आश्वासनों की बौछार होती है, परंतु ज़मीनी हालात यथावत बने रहते हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि धनबल के आगे कुछ अधिकारी अपने कर्तव्यों से विमुख होकर जनहित की बलि चढ़ा रहे हैं? यदि ऐसा है, तो यह न केवल प्रशासनिक पतन है, बल्कि सम्पूर्ण समाज और प्रकृति के भविष्य के लिए एक भयावह संकेत है।














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