

रानीगंज : मंगलपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित हुगली जूट मिल, जो विगत 13 वर्षों से बंद पड़ी थी, एक बार फिर से अपनी गतिविधियों को आरंभ करने की ओर अग्रसर है। इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद राजनीतिक संगठनों में इसका श्रेय लेने की होड़ मच गई है। जहां पहले माकपा के श्रमिक संगठन सीटू ने जूट मिल के पुनः संचालन का श्रेय लेने का प्रयास किया, वहीं तृणमूल कांग्रेस के श्रमिक संगठन आईएनटीटीयूसी ने सभा आयोजित कर इसे राज्य सरकार की उपलब्धि बताया।
मुख्यमंत्री और श्रम मंत्री को धन्यवाद
शनिवार शाम को जूट मिल परिसर में आयोजित सभा में आईएनटीटीयूसी के पश्चिम बर्दवान जिला अध्यक्ष अभिजीत घटक ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के कानून एवं श्रम मंत्री मलय घटक के प्रयासों के कारण ही यह संभव हो पाया है। उन्होंने बताया कि जूट मिल का पुनः संचालन स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगा और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करेगा। सभा में चेयरमैन मुजम्मिल हुसैन शहजादा, तृणमूल कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष देवनारायण दास, बल्लभपुर ग्राम पंचायत के उप प्रधान सिदान मंडल और वार्ड 34 के पार्षद ज्योति सिंह सहित अन्य नेता उपस्थित थे।
सीटू का दावा
वहीं, माकपा से संबद्ध सीटू के जिला महासचिव एवं पूर्व सांसद वंश गोपाल चौधरी ने दावा किया कि जूट मिल के पुनः संचालन का श्रेय उनके संगठन को है। उन्होंने कहा कि 2011 में तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद मिल बंद हो गई थी, और तभी से सीटू लगातार इसके संचालन की मांग करती रही है। चौधरी ने बताया कि सीटू ने श्रम मंत्री और अधिकारियों को कई पत्र लिखे और मिल चालू करने के लिए आंदोलनों का आयोजन किया।

पुनः संचालन की प्रक्रिया
सूत्रों के अनुसार, 13 नवंबर को श्रम मंत्री के कार्यालय में जूट मिल अधिकारियों और सरकार के बीच बैठक आयोजित हुई थी। इस बैठक के बाद जूट मिल अधिकारियों ने श्रम मंत्री को पत्र लिखकर 1 दिसंबर से मिल मेंटेनेंस कार्य शुरू करने का प्रस्ताव दिया। पत्र के मुताबिक, प्रतिदिन सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक एक शिफ्ट में कार्य होगा, जिसमें एक घंटे का समय भोजनावकाश के लिए आवंटित रहेगा। कार्य के अतिरिक्त दो घंटे के लिए कर्मचारियों को ओवरटाइम वेतन भी दिया जाएगा। कर्मचारियों की भर्ती चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।
हालांकि, काम के निलंबन के दौरान मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाएगा। इस निर्णय से श्रमिकों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया है।

जूट मिल का इतिहास
उल्लेखनीय है कि 2003-2004 में मंगलपुर में हुगली जूट मिल ने अपना संचालन शुरू किया था। लेकिन 2011 में इसे बंद कर दिया गया। उस समय मिल में लगभग 1,500 स्थायी और 400 अस्थायी कर्मचारी कार्यरत थे। मिल बंद होने के बाद राज्य सरकार ने 1,309 श्रमिकों को 1,500 रुपये मासिक भत्ता प्रदान करना शुरू किया था। वर्तमान में लगभग 1,100 श्रमिक इस भत्ते से लाभान्वित हो रहे हैं।
रोजगार के अवसर और क्षेत्रीय विकास
जूट मिल के पुनः संचालन से क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित होने और आर्थिक समृद्धि बढ़ने की उम्मीद है। राज्य सरकार द्वारा उद्योग और रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को इस पहल से बल मिलेगा।
हालांकि, राजनीतिक संगठनों के बीच श्रेय लेने की होड़ ने इस पहल को एक नई बहस का केंद्र बना दिया है। जनता को उम्मीद है कि जूट मिल का संचालन सुचारू रूप से आरंभ होगा और इससे स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार मिलेगा।















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