
आसनसोल : जब पश्चिम बंगाल में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लगभग 26,000 शिक्षक और शिक्षाकर्मी नौकरी से हाथ धो बैठे हैं और राज्यभर के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, ऐसे समय में चित्तरंजन रेलनगर के सिनियर बेसिक स्कूल में एक अजीब स्थिति सामने आई है। यहां सिर्फ नाममात्र के दो छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि स्कूल में सात शिक्षक और एक क्लर्क नियमित रूप से कार्यरत हैं।

चित्तरंजन रेलवे मेंस कांग्रेस के महासचिव इंद्रजीत सिंह ने इस गंभीर विसंगति को उजागर करते हुए पश्चिम बर्धमान के जिला विद्यालय निरीक्षक (DI) को पत्र लिखकर अविलंब हस्तक्षेप की मांग की है। उनका दावा है कि इस स्कूल में वास्तव में 13 शिक्षक और एक क्लर्क कार्यरत हैं, जिन्हें किसी भी प्रकार का कार्य नहीं सौंपा गया है, फिर भी वे नियमित वेतन प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने इसे सरकारी कोष का दुरुपयोग बताते हुए सभी शिक्षकों का स्थानांतरण अन्य जरूरतमंद विद्यालयों में करने की अपील की है।

इतना ही नहीं, इंद्रजीत सिंह ने यह भी सवाल उठाया कि जब स्कूल में छात्र ही नहीं हैं, तब मिड डे मील योजना किसके लिए चलाई जा रही है और इसके लिए स्वीकृत राशि कहां जा रही है?
इस मुद्दे पर तृणमूल शिक्षा प्रकोष्ठ के नेता अर्धेंदु रॉय ने बताया कि उन्होंने पहले ही इस विषय में कई बार ज्ञापन दिए हैं। उनके अनुसार, जिला विद्यालय निरीक्षक के निर्देश पर चित्तरंजन के स्कूल निरीक्षक ने मौके पर जाकर जांच की और रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद स्वयं जिला निरीक्षक ने स्कूल का दौरा किया और रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी, लेकिन पांच महीने बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

अर्धेंदु रॉय ने सुझाव दिया कि यहां के शिक्षकों को नजदीकी स्कूलों जैसे कि महिला समिति स्कूल, आछरा राय बलराम हाई स्कूल या कल्याणेश्वरी हाई स्कूल में स्थानांतरित कर देना चाहिए। इससे इन स्कूलों की शिक्षक कमी भी दूर होगी और सरकारी संसाधनों का सदुपयोग भी हो सकेगा। साथ ही, इस स्कूल को किसी अन्य विद्यालय में विलीन कर देना चाहिए, ताकि शेष दो छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।

इस संदर्भ में इंद्रजीत सिंह ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही करार देते हुए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की है।














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