
आसनसोल : पश्चिम बंगाल सरकार के ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार कार्यालय ने राज्य की सभी ट्रेड यूनियनों को एक महत्वपूर्ण नोटिस जारी कर उनके वर्तमान कार्यालय पदाधिकारियों की वैध और स्पष्ट जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद ट्रेड यूनियन जगत में हलचल मच गई है, विशेष रूप से उन यूनियनों में जो वर्षों से पूर्व कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रही हैं।

जारी नोटिस में रजिस्ट्रार कार्यालय ने यह स्पष्ट किया है कि कई यूनियनें अपने वार्षिक रिटर्न में गलत और भ्रामक विवरण प्रस्तुत कर रही हैं, विशेष रूप से पदाधिकारियों की स्थिति को लेकर। यह स्थिति ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 की धारा 22 (2) के स्पष्ट उल्लंघन के अंतर्गत आती है, जिसके अनुसार किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान से सेवानिवृत्त व्यक्ति को यूनियन में कार्यकारी पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता।

सिर्फ एक मानद सदस्य के रूप में ही बाहरी व्यक्ति को कार्यकारिणी समिति में स्थान दिया जा सकता है, परंतु उसे सचिव, कोषाध्यक्ष, मुख्य कार्यकारी अधिकारी या इसी प्रकार के किसी अन्य प्रमुख पद पर नहीं रखा जा सकता, यदि वह सक्रिय रोजगार में नहीं है।
यह निर्देश ऐसे समय आया है जब राज्य की कई ट्रेड यूनियनों, विशेषकर विपक्षी विचारधारा से जुड़ी यूनियनों में, वर्षों से ऐसे नेता पदों पर आसीन हैं, जो न तो किसी औद्योगिक संस्थान से जुड़े हैं, और न ही अब कार्यरत हैं। इसके बावजूद वे महत्वपूर्ण पदों पर बने हुए हैं।

सरकार द्वारा जारी यह नोटिस इन सभी यूनियनों से अपेक्षा करता है कि वे अपने कार्यालय पदाधिकारियों की सूची को अद्यतन कर रजिस्ट्रार कार्यालय को उपलब्ध कराएं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह आदेश केवल कागजों तक सीमित रहता है या वास्तव में इस पर कठोर अमल होता है।















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