

आसनसोल : आसनसोल गांव का ऐतिहासिक गाजन महोत्सव इस वर्ष 330वें वर्ष में प्रवेश कर गया। आधुनिकता की दौड़ में भी यह महोत्सव आज भी अपने पारंपरिक स्वरूप में ही मनाया जाता है, जो इसकी सांस्कृतिक समृद्धि और परंपरा के प्रति लोगों की आस्था को दर्शाता है।

इस महोत्सव का आयोजन श्री श्री नीलकंठेश्वर जिउ देवोत्तर ट्रस्ट और गाजन फेस्टिवल सेलिब्रेशन कमेटी ऑफ आसनसोल गांव के संयुक्त नेतृत्व में किया गया। आयोजन समिति के अध्यक्ष सचिन रॉय ने बताया कि गाजन महोत्सव की शुरुआत नकर रॉय और रामकृष्ण रॉय की उपस्थिति में विधिवत उद्घाटन के साथ हुई।

गुरुवार को गाजन संन्यासियों को शिव मंदिर में विधिपूर्वक संकल्प दिलाया गया। शुक्रवार को श्री श्री बनेश्वर की ‘नींद’ समारोह के बाद पारंपरिक ‘नगर परिक्रमा’ और शिवदोल यात्रा निकाली गई, जिसमें संन्यासियों का जुलूस आकर्षण का केंद्र रहा। शनिवार को संन्यासियों ने पवित्र स्नान कर शिव मंदिर में पूजा-अर्चना की।
रविवार को श्री श्री नीलकंठेश्वर की विशेष पूजा एवं होम यज्ञ संपन्न हुआ। दोपहर में ‘ठाकुर की जोड़ी’ निकाली गई, जबकि शाम को तालाब से शोभायात्रा के माध्यम से संन्यासियों और भक्तों की उपस्थिति में शिवदोल में प्रवेश कराया गया। रात में भक्ति संगीत, बाउल गायन, नृत्य और पारंपरिक धुनोबान कार्यक्रमों का आयोजन हुआ।

ट्रस्ट के सचिव अतिशबरन रॉय और समर रॉय ने बताया कि नववर्ष के पहले दिन गाजन संन्यासियों को नीम और हल्दी का सेवन कराया गया, जिसे नियम पालन का प्रतीक माना जाता है।
इस सात दिवसीय उत्सव में धर्म, जाति या वर्ग की परवाह किए बिना गांव के हर परिवार की भागीदारी रही। इस अवसर पर कोलकाता में रह रहे आसनसोल गांव के छात्र-छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक नाटक “रेबघिनी ने किंग्स ट्रैप में रोता है” और “लड़की” का मंचन किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

यह महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, परंपरा और संस्कृति का जीवंत उदाहरण है, जिसे पूरे गांव ने मिलकर भव्य रूप से संपन्न किया।














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