

आसनसोल : विकास की परिकल्पना को साकार रूप देने वाले आसनसोल के पूर्व महापौर एवं विधायक श्री जितेंद्र तिवारी ने जब जनसेवा को सर्वोपरि मानते हुए अपने पद से त्यागपत्र दिया, तब उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि सत्ता का मोह नहीं, अपितु जनकल्याण ही उनका प्रमुख ध्येय है। जिस पद के लिए लोग लालायित रहते हैं, उसे उन्होंने जनहित में त्यागते हुए यह संदेश दिया कि राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम होनी चाहिए।
आज जब पुनः चुनाव की प्रक्रिया समीप आ रही है, तो आसनसोल की देवतुल्य जनता के हाथों में एक बार फिर निर्णायक भूमिका है। यह वही जनता है, जिसके लिए श्री तिवारी ने अपने समस्त पद, प्रतिष्ठा और सत्ता को त्यागने में संकोच नहीं किया। अब समय है कि जनता अपने सच्चे सेवक को पुनः नेतृत्व सौंपे, जिससे कि आसनसोल में विकास की निर्मल गंगा पुनः प्रवाहित हो सके।

जितेंद्र तिवारी के कार्यकाल में जिस तरह से सड़क, बिजली, जलापूर्ति, स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई थी, वह किसी से छिपी नहीं है। उनकी योजनाओं और नीतियों ने आसनसोल को आधुनिकता के मार्ग पर अग्रसर किया था। उनका त्याग एक बार फिर यह सिद्ध करता है कि वह पद की नहीं, बल्कि जनसमर्थन और सच्ची सेवा की राजनीति में विश्वास रखते हैं।

अब जबकि जनता के हाथों में लोकतंत्र की अमूल्य चाबी है, तो यह अपेक्षा की जा रही है कि वह विकास के प्रति समर्पित उस नेता को पुनः अवसर देगी, जिसने उनके लिए सत्ता का मोह त्याग कर सेवा का मार्ग चुना। आसनसोल के विकास की नई इबारत लिखने का यह अवसर जनता के सम्मुख है, और आशा की जा रही है कि वह इस बार सोच-समझकर अपने सेवक को फिर से जनप्रतिनिधि चुनेगी।















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