कोलकाता : पश्चिम बंगाल में सामने आए बहुचर्चित साइबर ठगी प्रकरण में बुधवार को जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उद्योगपति पवन रुइया को गिरफ्तार कर लिया। राज्य पुलिस के साइबर अपराध विभाग द्वारा की गई इस गिरफ्तारी ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। आरोपी को कोलकाता के न्यू टाउन स्थित एक होटल से हिरासत में लिया गया, जिसके बाद उन्हें पूछताछ के लिए ले जाया गया।
जांच अधिकारियों के अनुसार, यह मामला करीब 315 करोड़ रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है, जिसमें अत्यंत संगठित तरीके से फर्जी कंपनियों का जाल बिछाया गया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस पूरे रैकेट में 148 शेल कंपनियों का उपयोग किया गया, जिनके माध्यम से बड़ी मात्रा में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन किया गया। यह धनराशि मुख्य रूप से साइबर ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मानी जा रही है।
यह प्रकरण बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में दर्ज किया गया था, जिसके बाद से पुलिस लगातार इसकी तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही थी। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आते गए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि मामला काफी व्यापक और सुनियोजित है।
इससे पहले इस मामले में एक अन्य आरोपी राहुल वर्मा को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब वह देश छोड़कर भागने की कोशिश कर रहा था। जांच एजेंसियों का मानना है कि राहुल वर्मा इस पूरे नेटवर्क का सक्रिय सदस्य था और उसने विभिन्न स्तरों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गिरफ्तारी की यह कार्रवाई उस समय संभव हो सकी, जब कलकत्ता उच्च न्यायालय ने आरोपी और उसके परिजनों को दी गई अंतरिम राहत को वापस ले लिया। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष दिसंबर में अदालत ने पवन रुइया, उनके पुत्र राघव रुइया और पुत्री पल्लवी रुइया को अग्रिम जमानत प्रदान की थी। हालांकि, सुरक्षा हटते ही जांच एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी सुनिश्चित की।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि ठगी का यह पूरा नेटवर्क मोबाइल एप्लीकेशन और व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से संचालित किया जा रहा था। आरोपियों द्वारा लोगों को अधिक लाभ का लालच देकर निवेश के लिए प्रेरित किया जाता था। विशेष रूप से बुजुर्गों को निशाना बनाकर उन्हें योजनाबद्ध तरीके से समूहों में जोड़ा जाता और धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश कराई जाती थी।
एक मामले में सामने आया है कि एक बुजुर्ग व्यक्ति से वर्ष 2023-24 के दौरान चरणबद्ध तरीके से लगभग 93 लाख रुपये का निवेश कराया गया, लेकिन बाद में उसे कोई राशि वापस नहीं मिली। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर इस पूरे रैकेट का खुलासा हुआ।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, रुइया परिवार से जुड़े विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये का लेनदेन किया गया है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग के संकेत भी स्पष्ट रूप से सामने आए हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां इन खातों की विस्तृत जांच कर रही हैं और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश जारी है।
अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अभी और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं, क्योंकि जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना न केवल एक बड़े आर्थिक अपराध को उजागर करती है, बल्कि आम लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में किसी भी अनजान लिंक, व्हाट्सएप समूह या अत्यधिक लाभ के प्रस्ताव से सतर्क रहना आवश्यक है।

















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