आसनसोल : पश्चिम बर्दवान जिले में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज़ हो गई हैं। मंगलवार को नामांकन प्रक्रिया के समापन के बाद सामने आए आंकड़ों के अनुसार जिले की नौ विधानसभा सीटों पर कुल 95 प्रत्याशियों ने अपने-अपने नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। इनमें 29 निर्दलीय उम्मीदवार भी शामिल हैं, जिससे इस बार चुनावी मुकाबला और अधिक रोचक व बहुआयामी हो गया है।

मंगलवार को प्रशासनिक स्तर पर नामांकन पत्रों की जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत सभी नामांकन पत्रों की वैधता की बारीकी से जांच की जा रही है। इसके बाद 9 अप्रैल को नाम वापसी की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। इस प्रक्रिया के पूर्ण होने के पश्चात सभी पात्र उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित कर अंतिम सूची जारी की जाएगी।
जिले की प्रमुख विधानसभा सीटों पर विभिन्न दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। पांडवेश्वर सीट पर वाम मोर्चा, तृणमूल कांग्रेस, भाजपा और कांग्रेस के साथ-साथ कई निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे यहां बहुकोणीय संघर्ष की स्थिति बन गई है। इसी तरह दुर्गापुर पूर्व और पश्चिम सीटों पर भी प्रमुख राजनीतिक दलों के अलावा क्षेत्रीय दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों की भागीदारी ने मुकाबले को जटिल बना दिया है।
रानीगंज विधानसभा क्षेत्र में इस बार विशेष रूप से दिलचस्प स्थिति बनी हुई है। यहां पारंपरिक दलों के साथ निर्दलीय उम्मीदवारों की सक्रियता ने चुनावी समीकरणों को नया मोड़ दिया है। जामुड़िया में भी तृणमूल कांग्रेस, भाजपा, वाम दलों और अन्य उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला होने की संभावना जताई जा रही है।
आसनसोल दक्षिण और उत्तर विधानसभा क्षेत्रों में भी चुनावी हलचल चरम पर है। आसनसोल उत्तर में जहां तृणमूल कांग्रेस, भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों के उम्मीदवार मैदान में हैं, वहीं निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या भी उल्लेखनीय है। इससे यहां वोटों के बिखराव की संभावना बढ़ गई है, जो अंतिम परिणाम को प्रभावित कर सकती है।
कुल्टी और बाराबनी विधानसभा क्षेत्रों में भी राजनीतिक दलों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। बाराबनी में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी लड़ाई मानी जा रही है, लेकिन अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों की उपस्थिति मुकाबले को रोचक बना रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लग सकती है। इससे प्रमुख दलों के लिए जीत का रास्ता आसान नहीं होगा। साथ ही, स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि और जमीनी पकड़ भी निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
कुल मिलाकर, पश्चिम बर्दवान जिले की नौ विधानसभा सीटों पर इस बार का चुनाव बहुकोणीय और बेहद प्रतिस्पर्धी नजर आ रहा है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी की नजरें अंतिम उम्मीदवार सूची और आगामी चुनाव प्रचार पर टिकी हैं, जहां असली राजनीतिक मुकाबले की तस्वीर साफ होगी।















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