आसनसोल/पश्चिम बर्धमान : विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बर्धमान जिले में मतदाता सूची को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। सिस्टमैटिक इन्क्लूजन एंड रिमूवल (SIR) प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने के बाद जिले का कुल वोटर आधार उल्लेखनीय रूप से घट गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस प्रक्रिया के बाद 3,05,591 मतदाताओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप अब जिले में कुल पात्र मतदाताओं की संख्या घटकर 19,52,432 रह गई है। मौजूदा परिस्थितियों में, यदि उच्चतम न्यायालय से कोई नया निर्देश नहीं आता है, तो यही मतदाता 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।
सूत्रों के मुताबिक, जिन मामलों पर निर्णय लंबित था, उनका अंतिम निपटारा 6 अप्रैल को पूरा किया गया। कुल 1,37,834 मामलों में से 63,734 लोगों को पात्र माना गया, जबकि 74,100 व्यक्तियों को अपात्र घोषित किया गया। पात्र घोषित किए गए मतदाताओं के नाम अब अंतिम सूची में शामिल कर दिए गए हैं, जबकि अपात्र पाए गए लोगों को पुनः नाम जुड़वाने के लिए ट्रिब्यूनल का सहारा लेना होगा।
चुनाव आयोग द्वारा 15 मार्च तक तैयार की गई अस्थायी सूची में 18,88,698 मतदाताओं के नाम शामिल थे। बाद में पात्र पाए गए 63,734 नामों को जोड़ने के बाद यह संख्या बढ़कर 19,52,432 हो गई। हालांकि, जिन लोगों को अपात्र घोषित किया गया है, उनके लिए अभी भी न्यायिक प्रक्रिया का विकल्प खुला है।
जानकारों का कहना है कि ट्रिब्यूनल के माध्यम से पात्र घोषित होने वाले मतदाता आगामी चुनाव में मतदान कर पाएंगे या नहीं, यह 13 अप्रैल को उच्चतम न्यायालय के संभावित निर्देशों पर निर्भर करेगा। ऐसे में फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानी जा रही है।
यदि पिछले आंकड़ों से तुलना की जाए, तो नवंबर 2025 में जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 23,27,112 थी। इसके बाद फरवरी 2026 में प्रकाशित प्रारंभिक सूची में यह संख्या घटकर 20,21,521 रह गई थी। अब अंतिम चरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह संख्या और कम होकर 19,52,432 पर आ गई है।
इस प्रकार, देखा जाए तो SIR प्रक्रिया के बाद जिले में मतदाता संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। चुनावी दृष्टिकोण से यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे मतदान प्रतिशत और चुनावी परिणामों पर भी असर पड़ सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची में इस प्रकार के बड़े बदलाव से विभिन्न दलों की रणनीतियों पर भी प्रभाव पड़ेगा। सभी दल अब शेष मतदाताओं तक पहुंच बनाने और उन्हें अपने पक्ष में करने के प्रयासों में जुट गए हैं।
फिलहाल, पश्चिम बर्धमान में चुनावी माहौल के बीच यह मुद्दा चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें आगामी न्यायिक निर्देशों और 23 अप्रैल को होने वाले मतदान पर टिकी हैं, जो इस बदले हुए मतदाता आधार के साथ संपन्न होगा।

















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