पूर्व बर्दवान : पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्दवान जिले के केतुग्राम क्षेत्र से गुरुवार तड़के एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई, जिसने अवैध बालू खनन के खतरनाक पहलुओं को एक बार फिर उजागर कर दिया है। अजय नदी में बालू से लदी एक नाव के पलट जाने से दो मजदूरों की डूबकर मौत हो गई, जबकि नौ अन्य किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहे। इस घटना ने इलाके में शोक और आक्रोश दोनों पैदा कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसा केतुग्राम के शंखाई पोस्ट ऑफिस घाट के समीप हुआ। बताया जा रहा है कि नाव पर कुल 11 मजदूर सवार थे, जो अवैध रूप से नदी से बालू निकालने के काम में लगे हुए थे। नाव पर गीली बालू अत्यधिक मात्रा में लाद दी गई थी, जिससे उसका संतुलन बिगड़ गया। अचानक नाव का संतुलन टूटने पर वह पलट गई और उसमें सवार मजदूर नदी में गिर पड़े।
हादसे के समय अंधेरा होने के कारण स्थिति और भी भयावह हो गई। नौ मजदूरों ने किसी तरह तैरकर अपनी जान बचा ली, लेकिन दो मजदूर नाव और बालू के नीचे दब गए। स्थानीय नाविकों और ग्रामीणों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और काफी मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
मृतकों में से एक की पहचान गणेश मंडल (38) के रूप में हुई है, जो मुर्शिदाबाद जिले के लालगोला क्षेत्र का निवासी था। दूसरे मृतक की पहचान समाचार लिखे जाने तक नहीं हो पाई थी। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। साथ ही पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में लंबे समय से अवैध बालू खनन का धंधा चल रहा है और इसमें बाहरी रेत माफिया सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनका कहना है कि मजदूरों को अधिक मजदूरी का लालच देकर इस जोखिम भरे काम में लगाया जाता है, जहां उनकी सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं होता।
स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि यह पहली घटना नहीं है। करीब चार महीने पहले भी इसी इलाके में इसी तरह का हादसा हुआ था, जिसमें कई मजदूरों की जान जोखिम में पड़ गई थी। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे अवैध खनन का कारोबार लगातार फल-फूल रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम उठाए होते, तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि अवैध बालू खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि इसमें लगे मजदूरों के जीवन के लिए भी अत्यंत जोखिम भरा होता है। बिना सुरक्षा उपायों के भारी मात्रा में बालू निकालना और उसे नावों में ढोना किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक अवैध खनन के कारण निर्दोष मजदूर अपनी जान गंवाते रहेंगे। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह इस पर गंभीरता से ध्यान दे और ऐसे अवैध कार्यों पर पूरी तरह अंकुश लगाए।
फिलहाल, पूरे इलाके में मातम का माहौल है और मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोग न्याय की मांग कर रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि इस बार प्रशासन ठोस कदम उठाएगा, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न सहना पड़े।















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