बीरभूम : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर सोमवार को बीरभूम जिले के खैराशोल में आयोजित एक चुनावी जनसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस सरकार पर जोरदार हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था, कथित घुसपैठ और राजनीतिक हिंसा जैसे मुद्दों को केंद्र में रखते हुए भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की।

सभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार वोट बैंक की राजनीति के चलते घुसपैठ की समस्या को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य में भाजपा की सरकार बनती है, तो अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और कानून का राज स्थापित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

गृह मंत्री ने अपने भाषण में कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि भाजपा समर्थकों के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा या उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे और उन्हें कानून के दायरे में लाया जाएगा। इस दौरान उन्होंने राज्य में राजनीतिक हिंसा के आरोपों को भी दोहराया और इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती बताया।
अमित शाह ने अपने संबोधन में राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अक्षमता के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान शासन में विकास कार्य बाधित हुए हैं और आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की सरकार बनने पर पारदर्शिता और सुशासन को प्राथमिकता दी जाएगी।

सभा के दौरान उन्होंने सांप्रदायिक तनाव और त्योहारों से जुड़े विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मौकों पर प्रशासन निष्पक्ष तरीके से काम करने में विफल रहा है, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हुआ। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सभी समुदायों को साथ लेकर चलने में विश्वास करती है और शांति व विकास की राजनीति को बढ़ावा देना चाहती है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच अमित शाह ने जनता से भाजपा को समर्थन देने की अपील की। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य की जनता बदलाव चाहती है और आगामी चुनाव में इसका असर देखने को मिलेगा। सभा में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे, जिनमें उत्साह का माहौल दिखाई दिया।
चुनावी माहौल में इस तरह के तीखे बयान यह संकेत देते हैं कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर पहुंच चुकी है। आने वाले दिनों में विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और भी तेज होने की संभावना है, जिससे चुनावी परिदृश्य और अधिक रोचक बनता जा रहा है।















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