दुर्गापुर में रोड शो के बाद झड़प, भाजपा-तृणमूल कार्यकर्ता घायल, बढ़ा तनाव

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दुर्गापुर :  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मंगलवार को दुर्गापुर में राजनीतिक माहौल उस समय अचानक तनावपूर्ण हो गया, जब केंद्रीय गृह मंत्री के रोड शो के समापन के तुरंत बाद बांकुड़ा मोड़ क्षेत्र में दो प्रमुख राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हो गई। देखते ही देखते यह विवाद हिंसक रूप ले बैठा और इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रोड शो समाप्त होने के बाद दोनों दलों के समर्थक आमने-सामने आ गए। पहले कहासुनी हुई, जो जल्द ही धक्का-मुक्की और फिर मारपीट में बदल गई। इस दौरान दोनों पक्षों के कई कार्यकर्ता घायल हो गए, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को तत्काल दुर्गापुर अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया और मौके पर अतिरिक्त बल तैनात कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। हालांकि, घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव बना हुआ है और एहतियात के तौर पर पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है।

घटना के बाद भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू कर दिया है। भाजपा की ओर से आरोप लगाया गया कि उनके कार्यकर्ता केवल शांतिपूर्वक कार्यक्रम में शामिल हुए थे, लेकिन लौटते समय तृणमूल समर्थकों ने उन पर हमला कर दिया। भाजपा नेताओं ने इसे सुनियोजित साजिश करार देते हुए कहा कि यह विपक्ष को डराने और दबाने की कोशिश है।

भाजपा के स्थानीय नेताओं का कहना है कि उनके एक कार्यकर्ता का सिर फट गया और कई अन्य को गंभीर चोटें आई हैं। उन्होंने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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वहीं दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा खुद माहौल को बिगाड़ने की कोशिश कर रही है और अनावश्यक रूप से तनाव पैदा कर रही है। तृणमूल के प्रतिनिधियों ने अस्पताल पहुंचकर अपने घायल कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और उन्हें हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया।

तृणमूल नेताओं ने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान शांति बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है, लेकिन कुछ राजनीतिक दल जानबूझकर अशांति फैलाकर राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि हिंसा की राजनीति से किसी का भला नहीं होगा और इससे केवल आम जनता ही परेशान होती है।

इस घटना के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंताजनक संकेत हैं। ऐसे समय में सभी दलों को संयम और जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए, ताकि शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किया जा सके।

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