आसनसोल/अंडाल : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। 23 अप्रैल को प्रस्तावित मतदान को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। बुधवार को चुनावी माहौल और अधिक सक्रिय नजर आया, जब राष्ट्रीय स्तर के नेता लगातार राज्य के विभिन्न हिस्सों में जनसभाएं कर मतदाताओं को साधने में जुटे रहे।
इसी क्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद Rahul Gandhi ने उत्तर बंगाल के कई महत्वपूर्ण जिलों में चुनावी सभाओं को संबोधित किया। उन्होंने उत्तर दिनाजपुर, मालदा और मुर्शिदाबाद में आयोजित रैलियों के माध्यम से पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में जनता से वोट की अपील की। इन सभाओं में उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया।
चुनावी कार्यक्रमों को पूरा करने के बाद Rahul Gandhi दोपहर के समय हेलीकॉप्टर से अंडाल हवाई अड्डे पहुंचे, जहां से उन्होंने दिल्ली के लिए प्रस्थान किया। अंडाल एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए पार्टी के स्थानीय नेता और पदाधिकारी मौजूद थे। इस दौरान पश्चिम बर्धमान जिले के वरिष्ठ कांग्रेस नेता फुरकान अंसारी तथा जिला कांग्रेस अध्यक्ष देबेश चक्रवर्ती ने उनका स्वागत किया।
सूत्रों के अनुसार, एयरपोर्ट पर संक्षिप्त प्रवास के दौरान राहुल गांधी ने जिले की चुनावी स्थिति और संगठनात्मक तैयारियों की जानकारी भी ली। उन्होंने स्थानीय नेतृत्व से बातचीत करते हुए चुनाव प्रचार को और अधिक तेज करने पर जोर दिया। साथ ही कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर जनसंपर्क बढ़ाने और पार्टी की नीतियों को प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे राष्ट्रीय नेताओं की सक्रियता भी बढ़ती जा रही है। इससे चुनावी मुकाबला और अधिक दिलचस्प होता जा रहा है। खासकर उत्तर बंगाल और सीमावर्ती जिलों में विभिन्न दलों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है।
पश्चिम बंगाल में इस बार बहुकोणीय मुकाबले के संकेत मिल रहे हैं, जहां तृणमूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस-वाम गठबंधन अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ मैदान में हैं। ऐसे में बड़े नेताओं की सभाएं और रोड शो चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
अंडाल एयरपोर्ट पर राहुल गांधी की मौजूदगी को लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह भी देखा गया। हालांकि उनका प्रवास संक्षिप्त रहा, लेकिन इस दौरान संगठन को मिली दिशा-निर्देशों से कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ है।
कुल मिलाकर, राज्य में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है और आने वाले दिनों में प्रचार और अधिक तेज होने की संभावना है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस सघन प्रचार अभियान का असर मतदाताओं के निर्णय पर कितना पड़ता है और आगामी चुनाव परिणाम किस दिशा में जाते हैं।
















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