दुर्गापुर/बांकुड़ा : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच बांकुड़ा जिले के संबंधा ग्राम पंचायत अंतर्गत चारबक पल्ली गांव में रविवार को राजनीतिक तनाव बढ़ गया। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि उसकी महिला कार्यकर्ताओं के साथ तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने दुर्व्यवहार किया और अभियान में बाधा पहुंचाई। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया, जिसके चलते पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को मौके पर पहुंचना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, भाजपा की महिला कार्यकर्ता गांव में घर-घर जाकर महिलाओं से संपर्क अभियान चला रही थीं। इस दौरान वे पार्टी की प्रस्तावित योजनाओं की जानकारी दे रही थीं और आवश्यक फॉर्म भरवाने का कार्य कर रही थीं। भाजपा का आरोप है कि इसी बीच तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेता और समर्थक वहां पहुंचे और कार्यकर्ताओं को घेर लिया।
भाजपा नेताओं का कहना है कि उनकी महिला कार्यकर्ताओं के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और अभियान रोकने का प्रयास किया गया। आरोप है कि उन्हें डराने-धमकाने के साथ यह भी कहा गया कि गांव में इस प्रकार की गतिविधियां नहीं चलने दी जाएंगी। घटना के बाद दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने आ गए, जिससे इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई।
स्थिति की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों के जवान मौके पर पहुंचे। सुरक्षा बलों ने दोनों पक्षों को अलग किया और माहौल शांत कराने का प्रयास किया। कुछ समय तक गांव में भारी तनाव बना रहा, लेकिन पुलिस हस्तक्षेप के बाद हालात नियंत्रित कर लिए गए।
घटना के विरोध में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बाद में बांकुड़ा शहर के केरानीगढ़ क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों पर कार्रवाई, महिला कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और निष्पक्ष चुनावी माहौल सुनिश्चित करने की मांग की। सड़क जाम के कारण कुछ समय तक यातायात प्रभावित रहा। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन पर प्रदर्शन समाप्त किया गया।

भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है और विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं को जनता तक पहुंचने से रोका जा रहा है। उनका कहना है कि यदि महिलाओं के बीच चलाए जा रहे अभियान में भी बाधा डाली जाएगी, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज किया है। स्थानीय तृणमूल नेता सोमनाथ मंडल ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता गांव की महिलाओं से पहचान पत्रों और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज एकत्र कर रहे थे, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह मामला प्रशासन के संज्ञान में लाया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले महिलाओं से जुड़े मुद्दे और योजनाएं इस बार प्रमुख चुनावी विषय बन गए हैं। इसी कारण गांव-गांव में अभियान चलाए जा रहे हैं और राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है।
पुलिस ने कहा है कि घटना की जानकारी ली जा रही है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे। यदि किसी प्रकार की शिकायत औपचारिक रूप से दर्ज होती है, तो नियमानुसार जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
चारबक पल्ली की यह घटना स्पष्ट संकेत देती है कि चुनावी मुकाबला अब गांव स्तर तक बेहद तीखा हो चुका है। आने वाले दिनों में ऐसे मुद्दे प्रदेश की राजनीति को और गर्मा सकते हैं।















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