
आसनसोल : रविवार को आसनसोल बार एसोसिएशन भवन में ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC) के तत्वावधान में एक महत्त्वपूर्ण आशा कर्मी अधिवेशन का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में महिला स्वास्थ्य स्वयंसेविकाओं ने सहभागिता की। उक्त अधिवेशन का मूल उद्देश्य आशा कर्मियों की कार्यगत पीड़ा, असुरक्षा, अल्पवेतन और भविष्य की अनिश्चितता के विषय में राज्य सरकार का ध्यानाकर्षण करना रहा।

अधिवेशन की मुख्य वक्ता यूनियन की प्रखर नेत्री उषा आचार्य ने आशा कर्मियों की दयनीय आर्थिक स्थिति की कठोर आलोचना करते हुए कहा कि वर्तमान में उन्हें मात्र ₹5200 मासिक मानदेय प्राप्त होता है, जो अत्यंत तुच्छ एवं असम्मानजनक है। उन्होंने सरकार से मांग की कि आशा कर्मियों का न्यूनतम वेतन ₹15,000 प्रतिमाह निर्धारित किया जाए, जिससे वे आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बन सकें।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सेवा काल के दौरान यदि किसी आशा कर्मी का आकस्मिक निधन होता है, तो उसके परिजनों को ₹5 लाख की अनुग्रह राशि तथा सेवा निवृत्ति के समय भी ₹5 लाख का समुचित आर्थिक संबल प्रदान किया जाना चाहिए। साथ ही, आशा कर्मियों को राज्य सरकार के अधीन स्थायी कर्मचारी का दर्जा प्रदान करने की माँग की गई, जिससे वे सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, स्वास्थ्य बीमा तथा अन्य शासकीय लाभों की पात्रता प्राप्त कर सकें।

नेत्री उषा आचार्य ने अपने ओजस्वी वक्तव्य में यह भी चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन मांगों की अनदेखी की, तो आगामी दो माह तक राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा और 22 अगस्त को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास का घेराव कर चेतावनी स्वरूप आमरण प्रदर्शन किया जाएगा।

इस सम्मेलन में आशा कार्यकर्ताओं के चेहरों पर आक्रोश, पीड़ा और संघर्षशील संकल्प का समन्वय स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हुआ। AIUTUC के इस प्रयास को आशा कर्मियों की न्यायोचित मांगों की ओर एक सशक्त कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो आगामी समय में राज्य सरकार की सामाजिक नीति को चुनौती दे सकता है।














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