आसनसोल : झारखंड और पश्चिम बंगाल में रंगदारी, धमकी और आपराधिक नेटवर्क संचालित करने के आरोपों में लंबे समय से फरार चल रहे गैंगस्टर प्रिंस खान के कथित साम्राज्य पर अब पुलिस का शिकंजा कसता नजर आ रहा है। शनिवार को इस मामले में नया मोड़ तब आया, जब बंगाल विशेष कार्यबल द्वारा गिरफ्तार किए गए प्रिंस खान के करीबी सहयोगी सैफ अब्बास नकवी उर्फ मेजर को लेकर धनबाद पुलिस ने सक्रियता बढ़ा दी। पुलिस अब उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी कर रही है।
सूत्रों के अनुसार मेजर की गिरफ्तारी को प्रिंस खान गिरोह के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि उसके पास गिरोह के संचालन, आर्थिक लेन-देन, रंगदारी वसूली तंत्र और फरार सरगना के ठिकानों से जुड़ी अहम जानकारी हो सकती है। इसी कारण धनबाद पुलिस उससे विस्तृत पूछताछ करना चाहती है।
शुक्रवार को बंगाल विशेष कार्यबल ने आरोपी को आसनसोल न्यायालय में पेश किया था। इस दौरान उसकी ओर से जमानत याचिका दायर की गई, लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया। न्यायालय के आदेश के बाद उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। इसके बाद झारखंड पुलिस ने उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि धनबाद से एक विशेष टीम शनिवार को आसनसोल पहुंचेगी। यह टीम न्यायालय में आवेदन देकर आरोपी को पूछताछ के लिए अपने साथ ले जाने की अनुमति मांगेगी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह की जड़ों तक पहुंचने के लिए यह पूछताछ अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जांच एजेंसियों के अनुसार प्रिंस खान पर झारखंड और बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापारियों, कोयला कारोबारियों और ठेकेदारों से रंगदारी मांगने के आरोप हैं। कई मामलों में फोन पर धमकी, भय पैदा करना और वसूली नेटवर्क चलाने की शिकायतें सामने आई थीं। आसनसोल क्षेत्र के एक कारोबारी से भी बड़ी रकम मांगने का आरोप चर्चा में रहा है।
मेजर से प्रारंभिक पूछताछ में कुछ महत्वपूर्ण संकेत मिलने की बात कही जा रही है। सूत्रों का दावा है कि आरोपी ने गिरोह के भीतर आर्थिक विवाद और पैसों के बंटवारे को लेकर मतभेद होने की जानकारी दी है। बताया जा रहा है कि गिरोह के सदस्यों के बीच रकम के हिस्से को लेकर विवाद बढ़ने से आंतरिक फूट पैदा हो गई थी।

जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि यह जानकारी सही है तो गिरोह की संरचना कमजोर पड़ सकती है। अपराध जगत में कई बार आर्थिक विवाद ही नेटवर्क टूटने का कारण बनते हैं। पुलिस इसी कमजोरी का लाभ उठाकर पूरे तंत्र को ध्वस्त करना चाहती है।
पूछताछ के दौरान प्रिंस खान के ठिकाने को लेकर भी नई जानकारी सामने आने की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते दबाव और जांच एजेंसियों की सक्रियता के कारण उसने अपना ठिकाना बदला है। हालांकि पुलिस ने आधिकारिक रूप से किसी स्थान की पुष्टि नहीं की है, लेकिन विभिन्न देशों में उसके संपर्कों की जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि संगठित अपराध से जुड़े आरोपी अक्सर विदेशों में छिपकर डिजिटल माध्यमों से नेटवर्क चलाने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में तकनीकी जांच, वित्तीय लेन-देन की निगरानी और अंतरराज्यीय समन्वय अत्यंत आवश्यक होता है। प्रिंस खान प्रकरण में भी इसी रणनीति पर काम किया जा रहा है।
धनबाद और आसनसोल क्षेत्र औद्योगिक एवं खनन गतिविधियों के कारण आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे क्षेत्रों में रंगदारी गिरोह व्यापारिक प्रतिष्ठानों और ठेकेदारों को निशाना बनाते रहे हैं। इसलिए पुलिस इस मामले को सामान्य आपराधिक घटना न मानकर संगठित अपराध के रूप में देख रही है।
स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने पुलिस कार्रवाई का स्वागत किया है। व्यापारियों का कहना है कि यदि इस प्रकार के गिरोहों पर समय रहते कार्रवाई हो तो कारोबारी वातावरण सुरक्षित रहेगा। उन्होंने पुलिस से मांग की है कि शिकायत करने वालों की पहचान सुरक्षित रखी जाए और धमकी देने वालों पर कठोर कार्रवाई हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि गिरोह के किसी करीबी सदस्य की गिरफ्तारी अक्सर जांच में निर्णायक साबित होती है। ऐसे आरोपी नेटवर्क, सहयोगियों, पैसों के स्रोत और संचालन पद्धति से जुड़े तथ्य बता सकते हैं। इसी कारण मेजर से पूछताछ को बेहद अहम माना जा रहा है।
पुलिस ने फिलहाल पूरे मामले पर आधिकारिक रूप से सीमित जानकारी दी है, लेकिन संकेत स्पष्ट हैं कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। संदिग्ध संपर्कों, बैंक लेन-देन, मोबाइल रिकॉर्ड और पुराने मामलों की भी समीक्षा की जा रही है।
शनिवार को आसनसोल और धनबाद दोनों क्षेत्रों में इस कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज रही। आम लोगों की नजर अब इस बात पर है कि पूछताछ से कौन-कौन से नए नाम सामने आते हैं और फरार गैंगस्टर तक पहुंचने में पुलिस को कितनी सफलता मिलती है।
फिलहाल कानून प्रवर्तन एजेंसियां सक्रिय हैं और दावा कर रही हैं कि संगठित रंगदारी नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए अभियान जारी रहेगा। यदि जांच में ठोस साक्ष्य मिलते हैं तो प्रिंस खान गिरोह के खिलाफ यह सबसे बड़ी कार्रवाई साबित हो सकती है।
















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