आसनसोल : वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान नृसिंह देव की जयंती श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाती है। गुरुवार को नगर सहित विभिन्न क्षेत्रों में भक्तों ने भगवान विष्णु के उग्र एवं करुणामय अवतार श्री नृसिंह देव का पूजन किया। मंदिरों में विशेष आरती, भजन, कीर्तन और मंत्रोच्चार के साथ भक्तों ने परिवार की सुख-समृद्धि तथा संकटों से मुक्ति की कामना की।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा और अत्याचारी हिरण्यकशिपु के अंत के लिए नृसिंह अवतार धारण किया था। यह अवतार आधा मनुष्य और आधा सिंह रूप में प्रकट हुआ था। भगवान नृसिंह को धर्म, सत्य और भक्ति की विजय का प्रतीक माना जाता है। इसलिए नृसिंह जयंती का पर्व भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
पुराणों में वर्णित है कि भगवान नृसिंह देव ने प्रह्लाद महाराज से कहा था कि जो श्रद्धालु इस व्रत का पालन करेंगे, वे जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होंगे। जो उपवास और नियमों का पालन करते हुए पूजा करेंगे, उन्हें जीवन में सुख, समृद्धि, संतान, यश और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होगा। इसी विश्वास के साथ भक्तगण यह व्रत रखते हैं।
गुरुवार सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। भक्तों ने स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए और भगवान नृसिंह की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पूजा-अर्चना की। कई श्रद्धालुओं ने दिनभर उपवास रखा और सायंकाल विशेष आरती के बाद प्रसाद ग्रहण किया।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार नृसिंह जयंती के दिन भगवान के 108 नामों का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है। भक्तिभाव से “ॐ नृसिंहाय नमः”, “ॐ महाबलाय नमः”, “ॐ उग्रलोचनाय नमः”, “ॐ प्रह्लादपालाय नमः”, “ॐ लक्ष्मीनृसिंहाय नमः” जैसे पवित्र नामों का स्मरण करने से भय, रोग और संकट दूर होते हैं।
मान्यता है कि भगवान नृसिंह विशेष रूप से अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। जो व्यक्ति सच्चे मन से उनकी आराधना करता है, उसे जीवन के कठिन समय में साहस और शक्ति प्राप्त होती है। व्यापार में बाधा, परिवार में कलह, मानसिक तनाव और शत्रु बाधा से मुक्ति के लिए भी इस दिन पूजन का विशेष महत्व बताया गया है।
महिलाओं ने परिवार की मंगलकामना के लिए व्रत रखा, वहीं युवाओं ने सफलता और उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना की। कई स्थानों पर सामूहिक सुंदरकांड, विष्णु सहस्रनाम पाठ और नृसिंह कवच का भी आयोजन किया गया। मंदिरों में प्रसाद के रूप में फल, पंचामृत और मिठाइयों का वितरण किया गया।
धर्माचार्यों ने बताया कि नृसिंह जयंती केवल उत्सव नहीं, बल्कि अन्याय पर न्याय और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देती है। भक्त प्रह्लाद की अटूट श्रद्धा यह सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। भगवान नृसिंह का प्राकट्य इस सत्य का प्रमाण है कि ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा अवश्य करते हैं।
पूजन विधि में पीले या लाल पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और तुलसी अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। संध्या समय भगवान की कथा सुनना और दान-पुण्य करना भी शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालुओं ने जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जलदान कर पुण्य अर्जित किया।
शहर के विभिन्न मंदिरों में सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष प्रबंध किए गए। श्रद्धालुओं ने अनुशासन के साथ दर्शन किए और पूरे दिन भक्ति का वातावरण बना रहा। भजन मंडलियों ने “नृसिंह भगवान की जय” के उद्घोष से माहौल भक्तिमय कर दिया।
नृसिंह जयंती का यह पावन पर्व श्रद्धा, साहस और धर्म की शक्ति का संदेश देता है। गुरुवार को भक्तों ने भगवान नृसिंह की आराधना कर जीवन में शांति, समृद्धि और सुरक्षा का आशीर्वाद मांगा। मान्यता है कि सच्ची भक्ति से किया गया यह व्रत भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करता है।

















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