रानीगंज : मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों से सामने आ रही तनावपूर्ण घटनाओं के बीच रानीगंज क्षेत्र से भी एक गंभीर मामला प्रकाश में आया। निमचा पुलिस फाड़ी अंतर्गत रोटीबाटी-चापुई इलाके में स्थित तृणमूल कांग्रेस के आंचलिक पार्टी कार्यालय में अचानक हुई तोड़फोड़ और हंगामे ने स्थानीय प्रशासन को सतर्क कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर कुछ अज्ञात हमलावरों का समूह अचानक पार्टी कार्यालय में घुस गया और अंदर जमकर उत्पात मचाया। कार्यालय के भीतर रखे फर्नीचर, टेबल-कुर्सियां, अलमारियां, पार्टी के झंडे-बैनर और खिड़की-दरवाजों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तोड़फोड़ के दौरान हमलावरों द्वारा जोर-जोर से नारेबाजी भी की जा रही थी, जिससे इलाके में अफरातफरी का माहौल बन गया।
घटना के समय तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता और रानीगंज पंचायत समिति के कर्माध्यक्ष विनोद नोनिया कार्यालय में मौजूद नहीं थे। हालांकि, हमलावरों का आक्रोश मुख्य रूप से उनके खिलाफ केंद्रित बताया जा रहा है। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, उनके नाम को लेकर लगातार नारे लगाए जा रहे थे, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ। आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के अंतर्गत स्थानीय पुलिस बल के साथ केंद्रीय अर्धसैनिक बल के जवान भी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई के चलते हालात को बिगड़ने से रोका जा सका।
इसी दौरान कुछ लोगों ने पुलिस के समक्ष यह आशंका जताई कि संबंधित नेता के आवास पर आपत्तिजनक सामग्री छिपाई गई हो सकती है। इस सूचना के आधार पर पुलिस और केंद्रीय बलों ने विनोद नोनिया के घर की गहन तलाशी ली। हालांकि तलाशी अभियान के दौरान कोई भी संदिग्ध या आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं हुई।
आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के एसीपी (सेंट्रल) बिमान कुमार मिर्धा ने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि तलाशी के समय संबंधित नेता घर पर मौजूद नहीं थे, लेकिन उनके परिजन वहां उपस्थित थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थिति फिलहाल पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
दूसरी ओर, इस घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा समर्थकों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से जनता में असंतोष व्याप्त था और चुनाव परिणामों के बाद वह अब सामने आ रहा है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने इस घटना को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन ने सभी पक्षों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की हिंसा या कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
कुल मिलाकर, चुनाव परिणामों के बाद उत्पन्न इस तनावपूर्ण माहौल ने एक बार फिर राजनीतिक शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। स्थानीय लोगों की निगाहें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

















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