

आसनसोल : धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर लगातार चोट कर रही घटनाओं के बीच आसनसोल नगर निगम के पूर्व मेयर एवं वरिष्ठ जनप्रतिनिधि जितेन्द्र तिवारी ने सामाजिक मीडिया मंच पर एक गहन एवं विचारोत्तेजक टिप्पणी की है। उन्होंने अत्यंत मर्मस्पर्शी शब्दों में लिखा है कि, “क्या कभी किसी ने यह सोचने का प्रयास किया है कि मनुष्य को जन्म के समय प्राप्त हुई उसकी धार्मिक पहचान ही किसी दिन उसकी मृत्यु का कारण बन सकती है?”
उन्होंने आगे लिखा कि जिन लोगों ने कभी यह कल्पना भी नहीं की होगी कि उनके धर्म के कारण उन्हें जीवन से वंचित कर दिया जाएगा, वे निःसंदेह धर्मनिरपेक्षता के आदर्श में आस्था रखते होंगे। हो सकता है वे विभिन्न धर्मों का आदर करते रहे हों, मानवता में विश्वास करते रहे हों, परंतु कट्टरपंथ की बर्बरता ने उनके अस्तित्व को ही नष्ट कर दिया।

तिवारी ने तीव्र वेदना के साथ यह प्रश्न उठाया कि जब किसी की धार्मिक पहचान उसकी हत्या का आधार बनती है, तब ‘धर्मनिरपेक्षता’ जैसे शब्दों की गरिमा और सार्थकता समाप्त हो जाती है। ऐसे अमानवीय कृत्यों के समक्ष ‘सम्मान’ जैसा उदात्त शब्द भी लज्जित होकर अपना मस्तक झुका लेता है।

पूर्व मेयर का यह वक्तव्य उन घटनाओं की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जहाँ हालिया समय में धर्म के आधार पर अनेक निर्दोषों को जीवन से हाथ धोना पड़ा। तिवारी की इस टिप्पणी को सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हो रही हैं, और विभिन्न वर्गों के नागरिक उनकी संवेदनशीलता एवं सामाजिक चेतना की सराहना कर रहे हैं।

इस वक्तव्य के माध्यम से उन्होंने केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, अपितु एक जागरूक नागरिक की भूमिका निभाई है, जिसने समाज को आत्मचिंतन का अवसर प्रदान किया है। उनके शब्द आज की सामाजिक विडंबनाओं पर एक कठोर प्रश्नचिन्ह की तरह गूंज रहे हैं।














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