आसनसोल : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में सत्ता परिवर्तन के बाद अब आसनसोल नगर निगम और बस स्टैंड से जुड़े पुराने मामलों की परतें एक-एक कर खुलने लगी हैं। भाजपा सरकार के गठन के बाद वर्षों से चल रहे कथित “डेवलपमेंट फीस” वसूली मामले ने फिर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। तृणमूल कांग्रेस से जुड़े श्रमिक नेता राजू अहलूवालिया ने आसनसोल बस स्टैंड में बसों से प्रतिदिन लिए जाने वाले शुल्क को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
राजू अहलूवालिया का आरोप है कि बस स्टैंड में “रखरखाव” और “विकास” के नाम पर लंबे समय से मिनी बसों और बड़ी बसों से प्रतिदिन रुपये वसूले जा रहे हैं, लेकिन उस राशि का पूरा हिसाब नगर निगम के खाते में जमा नहीं होता। उन्होंने कहा कि यह मामला नया नहीं है, बल्कि पहले भी इसको लेकर विवाद और शिकायतें सामने आ चुकी हैं। उनके अनुसार, वर्षों से कथित तौर पर बस चालकों और मालिकों से पैसा लिया जाता रहा, लेकिन यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पाईं।
इस पूरे विवाद को लेकर एक पुराना दस्तावेज भी फिर चर्चा में आ गया है। राजू अहलूवालिया ने वर्ष 2014 में तत्कालीन मेयर द्वारा पुलिस प्रशासन को भेजे गए पत्र का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भी बस स्टैंड डेवलपमेंट फीस में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया था। आरोप था कि बसों से प्रतिदिन शुल्क वसूला गया, लेकिन निगम के खाते में पूरी राशि जमा नहीं की गई। उस समय नगर निगम की ओर से पुलिस से जांच और बकाया राशि वसूली की मांग की गई थी।

अब एक बार फिर इस मामले को लेकर सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन दायर किया गया है। आवेदन में यह जानने की कोशिश की गई है कि आखिर किस नियम के तहत किसी निजी व्यक्ति या संस्था को सरकारी बस स्टैंड से शुल्क वसूलने का अधिकार दिया गया। साथ ही यह भी पूछा गया है कि अब तक कुल कितनी राशि वसूली गई, निगम में कितनी जमा हुई और कितनी राशि का हिसाब अभी तक स्पष्ट नहीं है।
राजू अहलूवालिया ने आरोप लगाया कि नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही और कई मामलों में कथित तौर पर मनमाने तरीके से लोगों को जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने दावा किया कि यदि वर्षों से वसूली गई राशि का सही उपयोग किया गया होता तो आज बस स्टैंड की स्थिति इतनी खराब नहीं होती। उन्होंने कहा कि यात्रियों को आज भी साफ पेयजल, व्यवस्थित प्रतीक्षालय, स्वच्छ शौचालय और मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ता है।
इस मामले में भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। आसनसोल उत्तर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक कृषनेन्दु मुखर्जी ने कहा कि नई सरकार भ्रष्टाचार, सिंडिकेट और अवैध वसूली के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नगर निगम के नाम पर अवैध रूप से धन वसूला गया है तो पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।
जानकारी के अनुसार, आसनसोल बस स्टैंड से प्रतिदिन सैकड़ों बसों का संचालन होता है। यदि प्रत्येक वाहन से प्रतिदिन 10 से 20 रुपये तक वसूले जाते हैं, तो यह रकम महीने और साल भर में लाखों रुपये तक पहुंच सकती है। इसी वजह से यह मामला अब राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से विकास शुल्क के नाम पर पैसा लिया गया, लेकिन बस स्टैंड की स्थिति में कोई बड़ा सुधार दिखाई नहीं दिया।
कई बस चालकों ने भी नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे लंबे समय से शुल्क देते आ रहे हैं, लेकिन विरोध करने पर दबाव और दुर्व्यवहार का डर बना रहता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद ऐसे पुराने मामलों की जांच तेज हो सकती है। वहीं आम लोगों की मांग है कि यदि सरकारी नाम पर धन वसूला गया है तो उसकी पूरी ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विकास शुल्क के नाम पर एकत्र की गई राशि आखिर कहां खर्च हुई।
अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और नई सरकार की कार्रवाई पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

















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