


आसनसोल : सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पश्चिम बंगाल के लगभग 26 हज़ार स्कूल शिक्षकों की नियुक्ति रद्द किए जाने के आदेश से उपजे शिक्षा‑संकट ने राज्य‑भर में उथल‑पुथल मचा दी है। आदेश के पश्चात पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन (एसएससी) कार्यालय के समक्ष दो दिन से अनवरत धरना‑प्रदर्शन जारी है; शिक्षक संगठन ‘योग्य‑अयोग्य सूची’ सार्वजनिक कर नियुक्ति‑रद्द प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग कर रहे हैं।
उधर, एसएससी ने बुधवार देर रात जिलावार ‘योग्य शिक्षकों’ की प्रावधिक सूची तैयार कर जिला विद्यालय निरीक्षकों को प्रेषित कर दी। पश्चिम बर्दवान जिले को प्राप्त नवीन तालिका के अनुसार कुल 324 शिक्षक ‘योग्य’ पाए गए हैं— जिनमें आसनसोल महकमा के 229 व दुर्गापुर महकमा के 95 पदाधिकारी सम्मिलित हैं। इन सभी को गुरुवार 25 अप्रैल से पुनः शालाओं में सेवाएँ आरम्भ करने के निर्देश भेजे गए।

रानीगंज की बसंती देवी गोयनका बालिका उच्च विद्यालय, जहाँ प्रारंभिक समीक्षा में 12 शिक्षक ‘अयोग्य’ करार दिए गये थे, ताज़ा सूची में उन सभी को ‘योग्य’ श्रेणी में स्थान मिला है। इसी प्रकार सियारसोल राज हाई स्कूल के दो में से एक शिक्षक को पुनः मान्यता प्रदान की गई। जिला स्तर पर अधिकांश विद्यालयों में संशोधित सूची पहुँचना आरम्भ हो चुकी है; प्रधानाध्यापकों को आदेश मिला है कि ‘योग्य’ शिक्षकों की कक्षाएँ निर्बाध चलें, जबकि ‘अयोग्य’ बताए गए कर्मियों के विषय में अगला परिपत्र प्राप्त होने तक प्रतीक्षा की जाए।

आंदोलन की पृष्ठभूमि व शिक्षक‑आक्रोश
सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती‑अनियमितताओं, अंक‑छेड़छाड़ व अनुचित लाभ के आरोपों पर सीबीआई रिपोर्ट के आधार पर नियुक्ति‑प्रक्रिया 2016‑21 को रद्द करते हुए राज्य सरकार को ‘मेधासूची पुनरीक्षण’ का निर्देश दिया था। परिणामस्वरूप हज़ारों परिवारों की आजीविका अधर में लटक गई। ‘योग्य’ प्रमाणित शिक्षक भी आशंकित हैं कि सूची बार‑बार बदलने से पुनः वंचित न कर दिए जाएँ।

एसएससी मुख्यालय के बाहर धरना‑स्थल पर शिक्षक नेता सुशांत मंडल ने कहा, “हम निष्पक्ष विशेषज्ञ कमेटी से सत्यापन चाहते हैं। जब तक अंतिम मेधा‑सूची राजपत्र में प्रकाशित नहीं होती, तब तक अनिश्चितता का आलम रहेगा।” आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि सूची अद्यतन करते समय भी राजनीतिक दबाव व पक्षपात जारी है।
सरकारी रुख
शिक्षा विभाग के अपर सचिव ने प्रेस‑वक्तव्य में कहा, “सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार त्रि‑स्तरीय जाँच के बाद ही पुनरीक्षित नामावलियाँ भेजी गई हैं। योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय नहीं होगा, परंतु जिनकी नियुक्ति ग़लत पाई गई, उनकी सेवाएँ स्वतः निरस्त मानी जाएँगी।” ‘अयोग्य’ शिक्षकों के लिए अलग वेतन‑पुनर्प्राप्ति एवं आपराधिक जाँच के संकेत भी मिले हैं।
इस निर्णायक फेरबदल ने विद्यालय‑शिक्षा को तत्काल व्यवधान में डाल दिया है। विद्यार्थी‑अभिभावकों में शैक्षणिक सत्र के मध्य शिक्षक‑परिवर्तन से भ्रम है। शिक्षक‑संघों ने चेतावनी दी है कि यदि पारदर्शी अंतिम सूची शीघ्र प्रकाशित न हुई तो राज्य‑व्यापी सामूहिक कार्यबहिष्कार संभावित है।














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