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ग्यारह वर्षों बाद खुली बंद दुकान, सत्ता परिवर्तन के बीच व्यापारी ने सुनाई पीड़ा की दास्तां

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आसनसोल :  शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के औद्योगिक शहर आसनसोल में एक ऐसी घटना चर्चा का विषय बनी रही, जिसने राजनीतिक वातावरण के साथ-साथ स्थानीय व्यापारिक समुदाय का भी ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। शहर के एक व्यवसायी ने दावा किया कि राजनीतिक मतभेदों के कारण उनकी दुकान पिछले ग्यारह वर्षों से बंद पड़ी थी, जो अब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद दोबारा खुल सकी है। इस घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।

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आसनसोल के निवासी एवं व्यवसायी दीपक कुमार मधुकर ने आरोप लगाया कि वर्ष 2015 के दौरान उन्हें भारतीय जनता पार्टी के प्रति समर्थन जताने की कीमत चुकानी पड़ी थी। उनका कहना है कि उस समय राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक हस्तक्षेप के कारण उनकी दुकान का संचालन बंद करा दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में उन्हें लगातार मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा और व्यवसाय से दूर रहना पड़ा।

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व्यवसायी के अनुसार, उनकी दुकान स्थानीय स्तर पर अच्छी पहचान रखती थी और इससे उनके परिवार का भरण-पोषण होता था। लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों के कारण कारोबार अचानक ठप हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय उन्हें यह तक कहा गया कि भाजपा समर्थकों को व्यवसाय करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके बाद कथित तौर पर धमकियां भी दी गईं, जिसके चलते उन्हें दुकान बंद करनी पड़ी।

शुक्रवार को दुकान के पुनः खुलने के दौरान इलाके में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और व्यापारी मौजूद रहे। कई लोगों ने दीपक कुमार मधुकर को शुभकामनाएं देते हुए इसे “नए दौर की शुरुआत” बताया। दुकान खुलने के बाद व्यवसायी ने भावुक होते हुए कहा कि लंबे संघर्ष और कठिन परिस्थितियों के बाद उन्हें फिर से सम्मानपूर्वक काम करने का अवसर मिला है।

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स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी व्यक्ति के व्यवसाय या आजीविका को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि वर्तमान समय में व्यापारियों को भयमुक्त वातावरण मिलेगा और सभी लोग स्वतंत्र रूप से अपना व्यवसाय चला सकेंगे।

घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। भाजपा समर्थकों ने इसे “राजनीतिक प्रताड़ना के अंत” के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि विपक्षी दलों की ओर से इस विषय पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएं राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और जनभावनाओं को भी प्रतिबिंबित करती हैं।

आसनसोल के व्यापारिक संगठनों ने भी इस पूरे मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि व्यापार और राजनीति को अलग रखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी विचारधारा रखने और स्वतंत्र रूप से जीवनयापन करने का अधिकार है।

फिलहाल दुकान खुलने के बाद क्षेत्र में सामान्य गतिविधियां शुरू हो गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों बाद दुकान में फिर से रौनक लौटने से आसपास का बाजार भी सक्रिय दिखाई दे रहा है। वहीं इस घटना ने एक बार फिर राजनीतिक सहिष्णुता, लोकतांत्रिक अधिकारों और व्यापारिक स्वतंत्रता को लेकर बहस छेड़ दी है।

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