आसनसोल : आसनसोल नगर निगम में बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीर हटाने और कथित तोड़फोड़ की घटना को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया। घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस नेताओं और नगर निगम प्रशासन ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादा पर हमला बताते हुए प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। पूरे घटनाक्रम के बाद आसनसोल के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल और तनाव का वातावरण बना हुआ है।
घटना के विरोध में आसनसोल नगर निगम के मेयर बिधान उपाध्याय के नेतृत्व में वार्ड पार्षदों, मेयर परिषद सदस्यों और अन्य जनप्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल पश्चिम बर्दवान के जिलाधिकारी एस. पन्नाबलम से मिलने जिला प्रशासनिक कार्यालय पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई।
तृणमूल कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मंगलवार दोपहर भाजपा युवा मोर्चा से जुड़े कुछ कार्यकर्ता अचानक नगर निगम कार्यालय पहुंचे और महापौर कक्ष में प्रवेश कर गए। आरोप है कि वहां लगी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीर को हटाया गया तथा उसके साथ तोड़फोड़ की गई। बाद में उसी स्थान पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री की तस्वीरें लगा दी गईं।
नगर निगम प्रशासन का यह भी आरोप है कि घटना के दौरान निगम परिसर के अंदर उत्तेजनापूर्ण नारेबाजी की गई और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं, जिससे वहां मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच भय और असहजता का माहौल बन गया। घटना की जानकारी मिलते ही आसनसोल दक्षिण थाने की पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे तथा स्थिति को नियंत्रित किया गया।
मेयर बिधान उपाध्याय ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह केवल एक तस्वीर हटाने का मामला नहीं है, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि नगर निगम जैसे प्रशासनिक संस्थान में इस प्रकार की राजनीतिक गतिविधि और तोड़फोड़ पूरी तरह अस्वीकार्य है। मेयर ने आरोप लगाया कि जानबूझकर माहौल को अस्थिर करने और राजनीतिक तनाव पैदा करने की कोशिश की गई।
उन्होंने बताया कि घटना के तुरंत बाद आसनसोल दक्षिण थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। नगर निगम की ओर से दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। मेयर ने यह भी कहा कि जिलाधिकारी ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।
इस घटना के बाद नगर निगम परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। राजनीतिक दलों के समर्थकों की गतिविधियों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है।
घटना को लेकर तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर लोकतांत्रिक संस्थानों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। वहीं दूसरी ओर भाजपा की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।
स्थानीय नागरिकों के बीच भी इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल है। कई लोगों का मानना है कि सरकारी संस्थानों को राजनीतिक संघर्ष का केंद्र नहीं बनाया जाना चाहिए। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच प्रशासनिक संस्थाओं में टकराव की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक तनाव और अधिक बढ़ गया है तथा विभिन्न प्रशासनिक संस्थान भी अब राजनीतिक विवादों के केंद्र बनते जा रहे हैं। आसनसोल नगर निगम में हुआ यह विवाद भी उसी बदलते राजनीतिक परिदृश्य का संकेत माना जा रहा है।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आसनसोल नगर निगम में शुरू हुआ यह विवाद अब स्थानीय राजनीति से निकलकर व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय बन चुका है।

















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