आसनसोल : पश्चिम बर्धमान जिले में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती खींचतान और नेताओं की लगातार हो रही गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी जहां पहले से दबाव में है, वहीं अब जिला नेतृत्व और स्थानीय नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद से ही जिले में कई तृणमूल नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जबरन वसूली, हिंसा और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोपों में कार्रवाई हो रही है। पुलिस की सक्रियता के कारण पार्टी संगठन में बेचैनी और असंतोष का माहौल देखा जा रहा है।
बुधवार को इस पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ तब ले लिया, जब पश्चिम बर्धमान तृणमूल कांग्रेस के जिला अध्यक्ष नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक वीडियो संदेश जारी कर प्रशासन और नई सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के बाद राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से तृणमूल कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, पुलिस लगातार विभिन्न इलाकों में जाकर पार्टी समर्थकों और कार्यकर्ताओं को परेशान कर रही है, जिससे आम लोगों के बीच भय का वातावरण बन गया है।
नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती ने अपने संदेश में कहा कि पांडवेश्वर सहित पूरे जिले में तृणमूल समर्थकों के घरों पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई कार्यकर्ता डर के कारण अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी मामले में पूछताछ करनी है तो सीधे पार्टी नेतृत्व से संपर्क किया जाए, आम कार्यकर्ताओं को परेशान न किया जाए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि जिला नेतृत्व खुद को भी संभावित कार्रवाई से घिरा महसूस कर रहा है।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों में पांडवेश्वर ब्लॉक अध्यक्ष सतदीप घोष, चोरा ग्राम पंचायत के प्रधान रामचरित पासवान सहित कई नेताओं की गिरफ्तारी के बाद तृणमूल संगठन के भीतर असहज स्थिति पैदा हो गई है। पुलिस लगातार पुराने मामलों की जांच कर रही है और चुनाव के बाद हिंसा से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई तेज कर दी गई है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि पिछली सरकार के दौरान कई इलाकों में राजनीतिक संरक्षण के नाम पर भ्रष्टाचार और दबाव की राजनीति चलती रही, जिसकी अब जांच हो रही है।
हालांकि तृणमूल कांग्रेस के भीतर ही नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती के बयान को लेकर विरोध शुरू हो गया है। पार्टी के एक अन्य ब्लॉक अध्यक्ष सुजीत मुखर्जी ने खुलकर जिला अध्यक्ष के खिलाफ नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराते हैं और संगठन को कमजोर करते हैं। उनका कहना था कि पार्टी नेताओं को कार्यकर्ताओं में डर फैलाने के बजाय उन्हें भरोसा देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव में धांधली और साजिश जैसे आरोप लगाकर संगठन अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
सुजीत मुखर्जी ने यह भी संकेत दिया कि तृणमूल कांग्रेस की हार के पीछे संगठनात्मक कमजोरी और आंतरिक गुटबाजी बड़ी वजह रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव में हार के बाद अब पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर भी संघर्ष शुरू हो गया है। जिला स्तर पर कई नेता अपनी राजनीतिक जमीन बचाने में जुटे हैं, जबकि दूसरी ओर भाजपा लगातार कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर तृणमूल को घेर रही है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य में नई सरकार बनने के बाद कानून अपना काम कर रहा है और जिन लोगों पर गंभीर आरोप हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई स्वाभाविक है। पार्टी का दावा है कि अब प्रशासनिक तंत्र पर राजनीतिक दबाव नहीं है और हर मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। वहीं तृणमूल कांग्रेस लगातार इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दे रही है।
फिलहाल पश्चिम बर्धमान जिले में तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती बयानबाजी और नेताओं की गिरफ्तारी ने राजनीतिक माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है। आने वाले दिनों में पार्टी संगठन इस संकट से कैसे निपटता है और प्रशासनिक कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

















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