आसनसोल : राज्य सरकार ने प्रशासनिक अनुशासन को मजबूत करने और गोपनीय सूचनाओं के अनधिकृत प्रसार पर रोक लगाने के उद्देश्य से सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए नई आचार-संहिता लागू कर दी है। गुरुवार को नवान्न से जारी दिशा-निर्देशों में मीडिया, सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर बयान देने को लेकर सख्त नियम निर्धारित किए गए हैं। इस निर्णय के बाद राज्य के प्रशासनिक हलकों में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल द्वारा जारी आदेश राज्य के सभी विभागों, जिला प्रशासन, पुलिस इकाइयों, नगर निकायों तथा स्वायत्त संस्थाओं को भेजा गया है। निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि अब कोई भी सरकारी कर्मचारी पूर्व अनुमति के बिना मीडिया से बातचीत नहीं कर सकेगा। किसी समाचार चैनल, सार्वजनिक कार्यक्रम, सेमिनार या निजी मंच पर भाग लेने के लिए भी संबंधित विभाग की अनुमति अनिवार्य होगी।
नई व्यवस्था के अनुसार सरकारी दस्तावेज, फाइल, आधिकारिक सूचना अथवा गोपनीय रिपोर्ट किसी भी माध्यम से सार्वजनिक करना गंभीर अनुशासनहीनता मानी जाएगी। यदि कोई कर्मचारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सूचनाएं लीक करता पाया गया, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सरकार का मानना है कि हाल के दिनों में संवेदनशील सूचनाओं के बाहर आने और अनधिकृत टिप्पणियों के कारण प्रशासनिक कार्यप्रणाली प्रभावित हुई है, जिसे नियंत्रित करना आवश्यक हो गया था।
निर्देश में सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी विशेष जोर दिया गया है। कर्मचारियों को फेसबुक, एक्स, यूट्यूब, इंस्टाग्राम अथवा अन्य डिजिटल मंचों पर सरकार की नीतियों से संबंधित टिप्पणी करने से बचने को कहा गया है। किसी भी विवादित या राजनीतिक टिप्पणी को सेवा नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। इसके अलावा, बिना अनुमति लेख, स्तंभ या संपादकीय लिखने तथा किसी पत्रिका या मीडिया मंच के संचालन से जुड़ने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी ऐसा सार्वजनिक वक्तव्य नहीं देगा जिससे केंद्र और राज्य सरकार के संबंध प्रभावित हों अथवा विदेश नीति और प्रशासनिक प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल असर पड़े। सरकार का कहना है कि यह कदम प्रशासनिक निष्पक्षता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
यह नियम आईएएस, डब्ल्यूबीसीएस, पुलिस अधिकारियों, जेल प्रशासन, नगर निगमों, नगरपालिकाओं तथा सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों पर भी समान रूप से लागू होगा। यानी राज्य का लगभग पूरा प्रशासनिक ढांचा अब इस नई आचार-संहिता के दायरे में आ गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, आगामी दिनों में इन नियमों के पालन की नियमित निगरानी भी की जाएगी। वहीं प्रशासनिक वर्ग में इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ अधिकारी इसे अनुशासन और गोपनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नियंत्रण के रूप में देख रहे हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने के लिए यह निर्णय आवश्यक था।

















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