आसनसोल : नगर निगम के वार्ड संख्या 41 में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और ठेके प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव को लेकर गुरुवार को नया विवाद खड़ा हो गया। आसनसोल चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव शंभूनाथ झा ने नगर निगम आयुक्त को लिखित शिकायत सौंपकर वार्ड पार्षद के कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। शिकायत सामने आने के बाद नगर निगम और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि वार्ड पार्षद सार्वजनिक मंचों पर स्वयं को ईमानदार और पारदर्शी जनप्रतिनिधि बताते रहे हैं, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर नगर निगम के कार्यों में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि पार्षद की पत्नी के नाम पर नगर निगम का टेंडर लिया गया, जिससे हितों के टकराव और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से कहा गया कि नगर निगम द्वारा विभिन्न शिविरों के माध्यम से नागरिकों से कर और शुल्क की वसूली की जाती है। यह धन आम जनता की गाढ़ी कमाई से जुड़ा होता है, इसलिए उसके उपयोग में किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जा सकती। शिकायतकर्ता ने कहा कि यदि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता नहीं रही तो लोगों का प्रशासन से विश्वास उठ जाएगा।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि बीते पांच वर्षों के दौरान वार्ड संख्या 41 में कई निर्माण और विकास कार्यों में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप है कि कई आवासीय परिसरों और फ्लैट परियोजनाओं में नियमों की अनदेखी की गई। शिकायतकर्ता ने मांग की कि वार्ड के अंतर्गत निर्मित सभी रिहायशी फ्लैटों और भवनों की तकनीकी तथा वित्तीय जांच कराई जाए।
इसके अलावा जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि कई इमारतों में जलापूर्ति के लिए किए गए बोरिंग कार्यों का निर्धारित शुल्क निगम में जमा हुआ है या नहीं, इसकी भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। आरोप लगाया गया कि यदि शुल्क जमा नहीं हुआ है तो इससे नगर निगम को राजस्व की हानि हुई है।
शंभूनाथ झा ने मांग की कि जांच पूरी होने तक वार्ड संख्या 41 से जुड़े सभी भुगतानों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। साथ ही पार्षद की पत्नी के नाम पर लिए गए किसी भी कार्य का भुगतान तब तक न किया जाए, जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पूरी न हो जाए।
हालांकि इस मामले में संबंधित पार्षद की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। नगर निगम सूत्रों का कहना है कि शिकायत पत्र प्राप्त हो गया है और नियमों के अनुरूप पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी। मामले के सार्वजनिक होने के बाद शहर के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में पारदर्शिता तथा जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है।

















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