बर्नपुर : शनिवार को बर्नपुर में सेल-आईएसपी की भूमि पर कथित रूप से अवैध निर्माणों के खिलाफ चलाए गए अभियान ने पूरे औद्योगिक क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज कर दी। प्रशासनिक कार्रवाई के तहत आसनसोल नगर निगम के वार्ड संख्या 78 से जुड़े तृणमूल कांग्रेस पार्षद अशोक रुद्र के कार्यालय सहित कई निर्माणों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

सेल-आईएसपी प्रबंधन का कहना है कि संबंधित कार्यालय और अन्य ढांचे कंपनी की जमीन पर बिना वैध अनुमति के बनाए गए थे। अधिकारियों के अनुसार इन निर्माणों को हटाने के लिए पहले भी कई बार नोटिस जारी किए गए थे और संबंधित पक्षों को स्वेच्छा से स्थल खाली करने का पर्याप्त समय दिया गया था। बावजूद इसके जब निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तब प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई।
शनिवार सुबह जैसे ही बुलडोजर मौके पर पहुंचा, इलाके में लोगों की भीड़ जमा होने लगी। कार्रवाई को लेकर राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच चर्चा तेज हो गई। कई स्थानीय लोगों ने इसे प्रशासन की सख्ती बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे बदलते राजनीतिक माहौल से जोड़कर देखा।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए आसनसोल उत्तर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने कहा कि राज्य में लंबे समय से सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और निर्माण की प्रवृत्ति बढ़ती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई दशकों में राजनीतिक संरक्षण के कारण अनेक स्थानों पर सरकारी और सार्वजनिक भूमि पर बिना अनुमति निर्माण किए गए। विधायक ने कहा कि अब प्रशासन अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त रुख अपना रहा है और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई किसी एक राजनीतिक दल को लक्ष्य बनाकर नहीं की जा रही है, बल्कि सरकारी भूमि पर बने सभी अवैध निर्माणों के खिलाफ समान रूप से कदम उठाए जा रहे हैं। विधायक ने यह भी कहा कि यदि किसी धार्मिक स्थल, पार्टी कार्यालय या अन्य भवन का निर्माण बिना वैध अनुमति के सरकारी जमीन पर हुआ है, तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
भाजपा नेताओं का दावा है कि वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था में विकास परियोजनाओं और सार्वजनिक हित को प्राथमिकता दी जा रही है। उनका कहना है कि अवैध कब्जों के कारण कई महत्वपूर्ण विकास योजनाएं प्रभावित होती रही हैं। इसलिए भूमि को अतिक्रमण मुक्त करना आवश्यक हो गया है।

दूसरी ओर, स्थानीय राजनीतिक हलकों में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। हालांकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन समर्थकों के बीच नाराजगी देखी जा रही है। कई लोगों का कहना है कि कार्रवाई से पहले वैकल्पिक व्यवस्था और विस्तृत बातचीत की जानी चाहिए थी।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि अभियान पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत चलाया गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन लगातार मौजूद रहा। अधिकारियों के अनुसार भविष्य में भी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों और निर्माणों के खिलाफ इसी प्रकार की कार्रवाई जारी रहेगी।
औद्योगिक क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि बर्नपुर और आसपास के इलाकों में भूमि विवाद लंबे समय से एक गंभीर मुद्दा रहे हैं। सरकारी और औद्योगिक संस्थानों की जमीनों पर अतिक्रमण को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की कार्रवाई आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और अधिक चर्चा का विषय बन सकती है।















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