

आसनसोल : आसनसोल के साऊथ थाना में एक गंभीर शिकायत दर्ज की गई है, जिसमें मुफ़्ती सैयद असद कासमी ने भाजपा नेता कृषनेन्दु मुखर्जी के खिलाफ आरोप लगाया है। उनका कहना है कि भाजपा नेता ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से एक वीडियो साझा किया है, जो पूरी तरह से फर्जी है। इस वीडियो में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए जाते हैं, जिन्हें एडिट कर के जोड़ा गया है। मुफ़्ती असद कासमी का कहना है कि यह वीडियो उनकी छवि को खराब करने और उनके समुदाय को फंसाने की कोशिश है, और इसके लिए उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
मुफ़्ती कासमी ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता ने जानबूझकर इस वीडियो को साझा कर उनके और उनके समुदाय के खिलाफ गलत प्रचार किया है। वे चाहते हैं कि इस वीडियो को साझा करने वाले भाजपा नेता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। उनके अनुसार, इस तरह की गतिविधियों से समाज में असहमति और विवाद फैलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इस वीडियो को साझा करने वाले के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने की मांग की है।

दूसरी ओर, भाजपा नेता कृषनेन्दु मुखर्जी ने मुफ़्ती असद कासमी के आरोपों का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि मुफ़्ती को पहले अपने लोगों से यह पूछना चाहिए था कि उनकी रैली में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे क्यों लगाए गए। मुखर्जी का कहना था कि वह दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, उल्टा दोषियों को बचाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुफ़्ती असद कासमी दोषियों को पनाह दे रहे हैं और इस मामले को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।

भा.ज.पा. नेता कृषनेन्दु मुखर्जी ने कहा कि यदि मुफ़्ती असद कासमी को इस वीडियो में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे का विरोध करना था, तो उन्हें पहले अपनी रैली में यह नारे लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी। इसके अलावा, भाजपा ने भी साऊथ थाना में एक शिकायत दर्ज करवाई है, जिसमें वे वक्फ कानून के खिलाफ निकाली गई रैली में पाकिस्तान जिंदाबाद के लगाए गए नारे की जांच की मांग कर रहे हैं।

भा.ज.पा. नेता ने इस पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि इस वीडियो की सघन जांच की जानी चाहिए ताकि दोषियों को सजा दिलाई जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में इस प्रकार की कोई गलत हरकत न हो।
यह मामला अब राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से संवेदनशील बन चुका है, और दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के कारण स्थिति और भी जटिल हो गई है। इस विवाद को लेकर स्थानीय प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करने का दबाव है।














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