आसनसोल : शहर के एक प्रतिष्ठित विद्यालय में आयोजित ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविर के दौरान हुई छात्र की मौत के मामले ने गुरुवार को एक बार फिर तूल पकड़ लिया। घटना को कई दिन बीत जाने के बावजूद परिजनों को न्याय नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए मृत छात्र के माता-पिता ने जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की।
पीड़ित परिवार का कहना है कि उनके पुत्र की असामयिक मृत्यु ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों के अनुसार, घटना के दिन वे अपने बेटे को सामान्य दिनों की तरह विद्यालय छोड़कर लौटे थे, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें दुर्घटना की सूचना मिली। जब वे विद्यालय पहुंचे तो वहां का दृश्य देखकर स्तब्ध रह गए। उनका आरोप है कि आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पर्याप्त रूप से मौजूद नहीं थीं और समय पर प्रभावी प्रयास किए जाते तो शायद स्थिति अलग हो सकती थी।
माता-पिता का कहना है कि घटना के बाद से वे लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक जांच की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे बढ़ती दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि मामले की प्रत्येक पहलू से जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
गुरुवार को परिजनों ने नगर निगम में विपक्ष की नेता से मुलाकात कर अपनी पीड़ा साझा की। इस दौरान उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा किसी भी शैक्षणिक संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि सुरक्षा मानकों में किसी प्रकार की कमी रही है, तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष की नेता ने कहा कि किसी भी परिवार के लिए अपने बच्चे को खोने का दुख शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा कोई भी मामला अत्यंत संवेदनशील होता है और इसकी गहन जांच होनी चाहिए। उनका मानना है कि यदि कहीं लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों के बीच भी इस घटना को लेकर चिंता का माहौल है। कई लोगों का कहना है कि विद्यालयों में आयोजित खेलकूद और प्रशिक्षण गतिविधियों के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का भी मानना है कि जलक्रीड़ा या तैराकी जैसी गतिविधियों के दौरान प्रशिक्षित कर्मियों, प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं और आपातकालीन व्यवस्था का होना अनिवार्य है।
फिलहाल संबंधित एजेंसियों द्वारा मामले की जांच जारी है। परिजन न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं, जबकि समाज के विभिन्न वर्ग इस घटना से सबक लेते हुए शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की मांग कर रहे हैं। गुरुवार को उठी यह आवाज केवल एक परिवार के न्याय की मांग नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की व्यापक आवश्यकता की ओर भी संकेत कर रही है।

















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