आसनसोल : पश्चिम बर्दवान जिले में शुक्रवार को भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने जिला शासक कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। संगठन ने अल्पसंख्यक समुदायों और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लोगों के साथ कथित अत्याचार के मामलों पर प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान संगठन के नेताओं ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कमजोर वर्गों से जुड़े लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष सुशील रुइदास ने कहा कि संगठन की ओर से पहले भी जिला प्रशासन को स्थिति से अवगत कराया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक ईसाई, मुस्लिम समुदाय और एससी-एसटी वर्ग के लोगों से जुड़े मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है।

उन्होंने कहा कि प्रशासन से कई बार अपील की गई कि पीड़ित लोगों को न्याय मिले और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कदम उठाए जाएं। लेकिन जब स्थिति में सुधार नहीं दिखाई दिया तो संगठन को मजबूर होकर जिला शासक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि आने वाले सात दिनों के भीतर उनकी शिकायतों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। संगठन ने कहा कि उनका उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखने और पीड़ित लोगों को न्याय दिलाने की मांग उठाना है।
इस दौरान भीम आर्मी नेताओं ने पांडवेश्वर और उखड़ा थाना क्षेत्रों की पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। सुशील रुइदास ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में पुलिस संविधान में दिए गए अधिकारों की रक्षा करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि कमजोर वर्गों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
संगठन का कहना है कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव न हो। उन्होंने पुलिस और प्रशासन से निष्पक्ष जांच तथा पीड़ित पक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
जिला शासक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की बात सुनी और उनके ज्ञापन को स्वीकार किया। प्रशासन की ओर से मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी क्षेत्र में शांति और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए शिकायतों का समय पर समाधान जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन होता है तो संबंधित विभागों को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
फिलहाल भीम आर्मी के प्रदर्शन के बाद अब सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि सात दिनों के भीतर उचित कदम नहीं उठाए गए तो जिले में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
यह मामला अब केवल एक संगठन के विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानून व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक अधिकारों को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में प्रशासन इस मामले को किस तरह आगे बढ़ाता है, इस पर क्षेत्र की नजर बनी हुई है।

















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