रानीगंज : बुधवार को रानीगंज में एक कथित फर्जी अधिवक्ता बनकर लोगों को कानूनी सहायता का झांसा देने और आर्थिक रूप से परेशान करने के आरोप में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान रानीगंज के तारबांग्ला क्षेत्र निवासी सजल दास के रूप में बताई गई है। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे चार दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी पर आरोप है कि वह स्वयं को न्यायालय का प्रभावशाली अधिवक्ता बताकर लोगों से संपर्क करता था और कानूनी मामलों को सुलझाने का भरोसा देकर उनसे मोटी रकम लेता था। शिकायत मिलने के बाद रानीगंज थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और प्राथमिक तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए सजल दास को गिरफ्तार किया।
मामले की शुरुआत रानीगंज गिर्जापाड़ा निवासी महिला दायमंती सेनगुप्ता की शिकायत से हुई। महिला ने पुलिस को दिए आवेदन में आरोप लगाया कि पिता के निधन के बाद संपत्ति के कानूनी उत्तराधिकारी से जुड़े दस्तावेज तैयार कराने के लिए उन्होंने आरोपी से संपर्क किया था। इस दौरान सजल दास ने खुद को आसनसोल न्यायालय का बड़ा अधिवक्ता बताते हुए जल्द समाधान का आश्वासन दिया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी ने न केवल अधिवक्ता होने का दावा किया, बल्कि खुद को एक राजनीतिक संगठन के कानूनी प्रकोष्ठ से जुड़ा प्रभावशाली व्यक्ति भी बताया। विश्वास में लेकर उसने संपत्ति संबंधी कार्य पूरा कराने के नाम पर करीब 4 लाख 75 हजार रुपये नकद और ऑनलाइन माध्यम से लिए। लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी दस्तावेज तैयार नहीं हुए और न ही रकम वापस की गई।
महिला की शिकायत के बाद पुलिस ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। जांच के दौरान आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए दस्तावेजों, लेनदेन और अन्य संबंधित तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।
रानीगंज पुलिस ने आरोपी को आसनसोल जिला न्यायालय में पेश किया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी और आगे की पूछताछ के लिए चार दिनों की पुलिस रिमांड मंजूर की। मामले के जांच अधिकारी मिठू चटर्जी ने बताया कि पुलिस हिरासत के दौरान आरोपी से पूछताछ कर सभी पहलुओं की जांच की जाएगी।
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या आरोपी ने इस तरह से अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया है। इसके लिए पुराने मामलों और संभावित शिकायतों की जानकारी जुटाई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कानूनी मामलों में आम लोग अक्सर सही जानकारी के अभाव में ऐसे लोगों के झांसे में आ जाते हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी कानूनी सलाह के लिए अधिवक्ता की प्रमाणिकता अवश्य जांचें और संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आने वाले दिनों में मामले से जुड़े अन्य तथ्यों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।


















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