आसनसोल : पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक गौरव और सामाजिक समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से शनिवार को दयानंद विद्यालय, आसनसोल में पश्चिम बंग दिवस का आयोजन बड़े उत्साह, गरिमा और उल्लास के साथ किया गया। विद्यालय परिसर देशभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और विद्यार्थियों के जोश से सराबोर दिखाई दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और स्वागत समारोह के साथ हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक नारायण पासवान, शिक्षकगण, विशिष्ट अतिथि तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में राज्य की संस्कृति और इतिहास को जानने की विशेष उत्सुकता देखने को मिली।
अपने संबोधन में प्रधानाध्यापक नारायण पासवान ने पश्चिम बंग दिवस के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि साहित्य, कला, संगीत, विज्ञान और सामाजिक चेतना की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों को राज्य के महान विभूतियों के जीवन से प्रेरणा लेने और समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने का संदेश दिया।

कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में विद्यार्थियों के लिए आयोजित ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता शामिल रही। प्रतियोगिता में विभिन्न कक्षाओं के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पश्चिम बंगाल के इतिहास, संस्कृति, साहित्य, भूगोल तथा स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े प्रश्नों का उत्तर देकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में सामान्य ज्ञान के साथ-साथ अपने राज्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
इसके अतिरिक्त विद्यालय के स्काउट दल द्वारा अनुशासन, समर्पण और संगठन क्षमता का परिचय देते हुए प्रभावशाली मार्च पास्ट प्रस्तुत किया गया। स्काउट्स की सुसंगठित प्रस्तुति ने उपस्थित शिक्षकों, अभिभावकों और अतिथियों का ध्यान आकर्षित किया। विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और अनुशासन की सभी ने सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक धरोहर, लोक परंपराओं, साहित्यिक योगदान और सामाजिक आंदोलनों के बारे में जानकारी दी। वक्ताओं ने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना समय की आवश्यकता है, ताकि उनमें अपनी पहचान और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।
विद्यालय प्रशासन ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे न केवल ज्ञान का विस्तार होता है, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक मूल्यों को भी मजबूती मिलती है।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों, शिक्षकों और अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों की सराहना की गई तथा उन्हें भविष्य में भी इसी उत्साह के साथ शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया।
पश्चिम बंग दिवस का यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, प्रेरणा और सांस्कृतिक गौरव का एक यादगार अवसर बन गया, जिसने उनमें अपने राज्य की विरासत के प्रति सम्मान और आत्मगौरव की भावना को और अधिक मजबूत किया।


















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