कोलकाता : बंगाली साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति के उत्सव के रूप में आयोजित ‘कोलकाता कविता उत्सव–1433’ ने एक बार फिर साहित्य प्रेमियों को शब्दों और संवेदनाओं की अनूठी दुनिया से रूबरू कराया। कल्चरल एंड लिटरेरी फोरम ऑफ बंगाल के तत्वावधान में आयोजित यह प्रतिष्ठित आयोजन शुक्रवार सायं गोलपार्क स्थित रामकृष्ण मिशन सभागार में संपन्न हुआ, जहां राज्य के विभिन्न जिलों से आए कवियों, साहित्यकारों और संस्कृति प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति देखने को मिली।
लगातार चौथे वर्ष आयोजित इस साहित्यिक महोत्सव में लगभग 60 प्रतिष्ठित एवं उभरते रचनाकारों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान कवियों ने प्रेम, प्रकृति, मानवीय संवेदना, सामाजिक सरोकार, सांस्कृतिक मूल्यों और समकालीन चुनौतियों पर आधारित अपनी रचनाओं का पाठ किया। काव्य पाठ के माध्यम से साहित्यकारों ने न केवल बांग्ला भाषा की सौंदर्यपरक अभिव्यक्ति को सामने रखा, बल्कि समाज में साहित्य की प्रासंगिकता को भी रेखांकित किया।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं ने कविताओं का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। सभागार में साहित्य और संस्कृति के प्रति लोगों की गहरी रुचि स्पष्ट रूप से दिखाई दी। वरिष्ठ कवियों के साथ युवा रचनाकारों को भी मंच प्रदान किया गया, जिससे नई प्रतिभाओं को अपनी सृजनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिला।

इस अवसर पर पांडेश्वर विधानसभा क्षेत्र के विधायक तथा कल्चरल एंड लिटरेरी फोरम ऑफ बंगाल के अध्यक्ष जितेंद्र तिवारी ने कहा कि बांग्ला साहित्य देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। कविता मानव मन की संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने के साथ-साथ सामाजिक चेतना को जागृत करने का कार्य करती है।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में साहित्य और संस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। नई पीढ़ी को अपनी भाषा, परंपरा और साहित्यिक धरोहर से जोड़ना समय की मांग है। ऐसे आयोजन युवाओं को रचनात्मक अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करते हैं तथा उन्हें साहित्य के प्रति प्रेरित करते हैं।
जितेंद्र तिवारी ने कहा कि कल्चरल एंड लिटरेरी फोरम ऑफ बंगाल का उद्देश्य साहित्य और संस्कृति को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है। संस्था लगातार ऐसे मंच तैयार कर रही है जहां अनुभवी और नवोदित दोनों प्रकार के साहित्यकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी कविता उत्सव और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से साहित्यिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागी कवियों और साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। उपस्थित साहित्य प्रेमियों ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे बांग्ला साहित्य और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त बनाने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया। पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि साहित्य समाज को जोड़ने, विचारों को समृद्ध करने और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

















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