आसनसोल : भारतीय जनजीवन में राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक चेतना और अखंड भारत के प्रबल समर्थक रहे भारत केसरी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृतियों को नमन करते हुए मंगलवार को विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उनके जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में दिए गए अमूल्य योगदान का स्मरण किया गया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी शिक्षाविद्, प्रखर राष्ट्रचिंतक और जनसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व थे। उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन को राष्ट्रहित और जनकल्याण के लिए समर्पित किया। देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक गौरव की रक्षा के लिए उनके संघर्ष को आज भी आदरपूर्वक याद किया जाता है।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के विचार वर्तमान समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके जीवनकाल में थे। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी और समाज के प्रत्येक वर्ग को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया। शिक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनी हुई है।
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धा व्यक्त की। इस अवसर पर देशभक्ति, त्याग और समर्पण की भावना को आत्मसात करने का संकल्प भी लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन संघर्ष, साहस और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय उदाहरण है, जिससे प्रेरणा लेकर देश के विकास और सामाजिक उत्थान में योगदान दिया जा सकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने कहा कि भारत के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का योगदान सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। उनके आदर्शों का अनुसरण कर ही सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
अंत में उपस्थित लोगों ने उनके पावन स्मरण में मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा राष्ट्रहित में कार्य करने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

















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