रानीगंज : रानीगंज क्षेत्र में उस समय हलचल तेज हो गई, जब ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने अपनी भूमि पर बने एक कथित अवैध निर्माण को हटाने के लिए व्यापक अतिक्रमण-रोधी अभियान चलाया। प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में बुलडोजर की सहायता से संबंधित भवन को ध्वस्त कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं का दौर भी तेज हो गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईसीएल अधिकारियों ने पूर्व निर्धारित योजना के तहत अपनी भूमि पर कथित रूप से किए गए अवैध कब्जे को हटाने की कार्रवाई शुरू की। अभियान के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। सुरक्षा व्यवस्था के बीच जेसीबी मशीनों की मदद से निर्माण को हटाया गया।
कार्रवाई के समय चापुई कोलियरी के मानव संसाधन विभाग के अधिकारी तथा निमचा फाड़ी पुलिस के अधिकारी मौके पर उपस्थित रहे। अधिकारियों ने भवन के भीतर रखे फर्नीचर, टेबल, कुर्सियां, सोफा और अन्य सामग्री को पहले बाहर निकलवाया तथा आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद पूरे ढांचे को ध्वस्त कर दिया।
अभियान की सूचना मिलते ही आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। लोगों ने पूरी कार्रवाई को देखा, जबकि पुलिस लगातार स्थिति पर नजर बनाए रही। पूरे अभियान के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
स्थानीय स्तर पर यह दावा किया गया कि उक्त भवन का उपयोग एक राजनीतिक दल के स्थानीय कार्यालय के रूप में किया जाता था। हालांकि, इस संबंध में संबंधित राजनीतिक दल की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। इसलिए इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ईसीएल अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कंपनी की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा अथवा अनधिकृत निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि कंपनी की परिसंपत्तियों की सुरक्षा और भूमि को अतिक्रमण मुक्त बनाए रखने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है। भविष्य में भी जहां कहीं अवैध निर्माण या कब्जे की शिकायत मिलेगी, वहां नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
प्रशासनिक अधिकारियों ने भी कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी तरह विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत की जा रही है। आवश्यक नोटिस, अभिलेखों की जांच और संबंधित औपचारिकताओं के बाद ही ऐसे अभियान संचालित किए जाते हैं। इस कार्रवाई के बाद रानीगंज और आसपास के क्षेत्रों में इसकी व्यापक चर्चा रही। राजनीतिक हलकों में भी इसे लेकर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। फिलहाल, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन की ओर से आगे भी ऐसे अभियान किस स्तर तक जारी रखे जाते हैं तथा इस मामले में संबंधित पक्षों की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है।

















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