दुर्गापुर : राज्य बजट में दुर्गापुर में सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई स्थापित किए जाने की घोषणा औद्योगिक क्षेत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बनी रही। इस घोषणा ने लंबे समय से इस्पात, कोयला और भारी उद्योगों पर आधारित दुर्गापुर की औद्योगिक पहचान को नई दिशा मिलने की उम्मीद जगा दी है। उद्योग जगत, आर्थिक विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि यह परियोजना समयबद्ध ढंग से धरातल पर उतरती है, तो दुर्गापुर पूर्वी भारत के उभरते उच्च-प्रौद्योगिकी औद्योगिक केंद्र के रूप में नई पहचान बना सकता है।
औद्योगिक विशेषज्ञों का कहना है कि सेमीकंडक्टर उद्योग केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसके साथ इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, पैकेजिंग, परीक्षण, अनुसंधान एवं विकास, सॉफ्टवेयर सेवाएं, लॉजिस्टिक्स और अनेक सहायक उद्योगों का भी विकास होता है। ऐसे में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों स्तरों पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना बनती है। हालांकि, परियोजना की लागत, निवेश, उत्पादन क्षमता तथा रोजगार सृजन से संबंधित विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए रोजगार की संभावित संख्या पर कोई आधिकारिक अनुमान उपलब्ध नहीं है।
दुर्गापुर पहले से ही मजबूत औद्योगिक आधारभूत संरचना वाला शहर माना जाता है। यहां उत्कृष्ट सड़क और रेल संपर्क, पर्याप्त विद्युत आपूर्ति, औद्योगिक भूमि तथा प्रशिक्षित तकनीकी मानव संसाधन उपलब्ध हैं। इसके अलावा इंजीनियरिंग महाविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों से हर वर्ष बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवा निकलते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस परियोजना में स्थानीय प्रतिभाओं को प्राथमिकता दी जाती है तो रोजगार के लिए युवाओं का अन्य राज्यों की ओर पलायन काफी हद तक कम हो सकता है।
विश्लेषकों का यह भी मानना है कि शहर में बंद अथवा निष्क्रिय औद्योगिक परिसरों और अनुपयोगी भूमि का उपयोग आधुनिक प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों के लिए किया जा सकता है। इससे वर्षों से ठप पड़े औद्योगिक क्षेत्रों में नई आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए भी नए अवसर विकसित होंगे।
हालांकि विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की भी सलाह दी है। उनका कहना है कि सेमीकंडक्टर उद्योग अत्यधिक पूंजी, अत्याधुनिक तकनीक और उच्च प्रशिक्षित मानव संसाधन पर आधारित होता है। इसलिए केवल घोषणा पर्याप्त नहीं होगी। परियोजना को सफल बनाने के लिए भूमि चयन, आधुनिक आधारभूत संरचना, निर्बाध बिजली एवं जलापूर्ति, निवेशकों का विश्वास और कुशल मानव संसाधन तैयार करने जैसी प्रक्रियाओं को समानांतर रूप से आगे बढ़ाना आवश्यक होगा। यदि इन पहलुओं में विलंब हुआ तो परियोजना के अपेक्षित लाभ भी प्रभावित हो सकते हैं।
दुर्गापुर कभी देश के प्रमुख औद्योगिक नगरों में गिना जाता था, लेकिन बीते वर्षों में अनेक उद्योगों के बंद होने से रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों में गिरावट आई। ऐसे में सेमीकंडक्टर इकाई की प्रस्तावित स्थापना को कई उद्योग विशेषज्ञ केवल एक नई परियोजना नहीं, बल्कि दुर्गापुर के औद्योगिक पुनरुत्थान की संभावित शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।
फिलहाल यह घोषणा क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलती दिखाई दे रही है। अब सभी की निगाहें सरकार की आगामी कार्ययोजना, निवेश प्रक्रिया और परियोजना के क्रियान्वयन की गति पर टिकी हैं, क्योंकि इन्हीं पर इस महत्वाकांक्षी योजना की वास्तविक सफलता और भविष्य निर्भर करेगा।

















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