बाराबनी : बाराबनी विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2019 के कथित बम हमले का मामला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। गुरुवार को भाजपा नेताओं ने इस प्रकरण को उठाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। पार्टी का आरोप है कि घटना के कई वर्ष बीत जाने के बावजूद मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से पीड़ित पक्ष को अब तक न्याय नहीं मिल सका है।
भाजपा के जिला नेता अभिजीत राय ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि वर्ष 2019 में पार्टी के कार्यकर्ताओं पर राजनीतिक उद्देश्य से हमला किया गया था। उन्होंने दावा किया कि उस समय हुई हिंसक घटना में तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं असित सिंह और भोला सिंह के नाम सामने आए थे। हालांकि, उन्होंने कहा कि मामले में अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
अभिजीत राय ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन हिंसा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि सभी तथ्यों का पता चल सके और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा, “कानून सभी नागरिकों के लिए समान होना चाहिए। किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। यदि किसी ने अपराध किया है तो उसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत दंड मिलना चाहिए।”
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि राजनीतिक हिंसा लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती है और समाज में भय का वातावरण उत्पन्न करती है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण कर लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास मजबूत किया जाए।
इस बयान के बाद बाराबनी क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक तृणमूल कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
स्थानीय नागरिकों का भी मानना है कि पुराने मामलों में यदि निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाती है तो इससे न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ेगा तथा भविष्य में राजनीतिक हिंसा जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में सहायता मिलेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आगामी समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है। ऐसे में सभी पक्षों की नजर अब जांच एजेंसियों और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। फिलहाल यह मामला बाराबनी की राजनीति में एक बार फिर चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है और निष्पक्ष जांच की मांग लगातार जोर पकड़ रही है।

















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