आसनसोल : बुधवार को राज्य सरकार ने आसनसोल नगर निगम के निर्वाचित बोर्ड को भंग करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था की बागडोर प्रशासक के हाथों सौंप दी। इस निर्णय के बाद शिल्पांचल की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि नागरिक सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने तथा प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार का व्यवधान न आए, इसके लिए यह कदम उठाया गया है।

सरकारी आदेश के अनुसार, पश्चिम बंगाल नगर निगम अधिनियम, 2006 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत निगम बोर्ड को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। साथ ही वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं आसनसोल-दुर्गापुर विकास प्राधिकरण (एडीडीए) तथा आसनसोल नगर निगम की पूर्व आयुक्त अदिति चौधरी को प्रशासक नियुक्त किया गया है। वे नए निर्वाचित नगर बोर्ड के गठन अथवा अधिकतम छह माह तक निगम की प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगी।
सूत्रों के अनुसार, बीते कुछ समय से नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। नियमित बोर्ड बैठकें नहीं होने, प्रशासनिक निर्णयों में विलंब, संपत्ति कर में दी गई रियायतों तथा नागरिक सुविधाओं से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर राज्य के नगर विकास एवं नगर मामलों के विभाग ने निगम को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। निगम प्रशासन की ओर से विस्तृत जवाब भी प्रस्तुत किया गया, किंतु उपलब्ध स्पष्टीकरण से विभाग संतुष्ट नहीं हुआ। इसके बाद सरकार ने निगम बोर्ड को भंग करने का निर्णय लिया।

राजनीतिक और प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि हाल के दिनों में निगम के भीतर भी असंतोष का वातावरण बना हुआ था। कई पार्षदों और पदाधिकारियों के इस्तीफे तथा प्रशासनिक मतभेदों की खबरों ने स्थिति को और जटिल बना दिया था। इन घटनाक्रमों के बीच सरकार के इस निर्णय को प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि नगरवासियों को पेयजल, स्वच्छता, सड़क प्रकाश, कचरा प्रबंधन, स्वास्थ्य तथा अन्य आवश्यक नागरिक सेवाओं में किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी। प्रशासक के नेतृत्व में सभी विभागों की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
उधर, सरकार के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक पूर्व महापौर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई थी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासक के नेतृत्व में नगर निगम की व्यवस्था कितनी शीघ्र सामान्य होती है तथा नए निर्वाचित बोर्ड के गठन की प्रक्रिया कब प्रारंभ होती है।















Users Today : 6
Users Yesterday : 40