दो वर्ष आठ माह के सृजन कुंडू ने विलक्षण स्मरण शक्ति से इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में बनाया स्थान

Facebook
Twitter
WhatsApp

आसनसोल/पांडवेश्वर :  पश्चिम बर्दवान जिले के पांडवेश्वर थाना क्षेत्र अंतर्गत हरिपुर गांव के मात्र दो वर्ष आठ माह के बालक सृजन कुंडू ने अपनी अद्भुत स्मरण शक्ति और असाधारण बौद्धिक क्षमता के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान स्थापित की है। इतनी कम आयु में विलक्षण प्रतिभा का परिचय देते हुए सृजन का नाम वर्ष 2026 के इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र में हर्ष और गौरव का वातावरण है।

IMG 20250511 WA0050

सृजन की असाधारण स्मरण क्षमता ने विशेषज्ञों और आम लोगों को समान रूप से आश्चर्यचकित कर दिया है। सामान्यतः जिस आयु में बच्चे बोलना और आसपास की चीजों को पहचानना सीखते हैं, उसी आयु में सृजन ने अनेक विषयों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां कंठस्थ कर अपनी विलक्षण प्रतिभा का परिचय दिया है। उसकी सीखने और याद रखने की क्षमता को देखकर हर कोई उसकी प्रशंसा कर रहा है।

परिजनों के अनुसार सृजन को छह प्रकार के कीट-पतंगों, छह सरीसृपों तथा पंद्रह पशुओं के नाम सहजता से याद हैं। इसके अतिरिक्त वह पंद्रह प्रकार की सब्जियों, मानव शरीर के बीस अंगों, सप्ताह के सातों दिनों तथा वर्ष के बारहों महीनों का क्रम बिना किसी त्रुटि के सुना देता है। इतना ही नहीं, वह 37 देशों के राष्ट्रीय ध्वजों की पहचान, 14 महान स्वतंत्रता सेनानियों के नाम, भारत के आठ राष्ट्रीय प्रतीकों तथा 18 देवी-देवताओं के वाहनों का भी सटीक उल्लेख कर लेता है।

धार्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों में भी सृजन की रुचि उल्लेखनीय है। उसे 12 प्रमुख मंत्र पूरी शुद्धता के साथ कंठस्थ हैं तथा वह संपूर्ण हनुमान चालीसा का भी स्पष्ट और क्रमबद्ध पाठ कर लेता है। इतनी कम आयु में इस स्तर की स्मरण क्षमता ने उसे विशिष्ट पहचान दिलाई है।

IMG 20240918 WA0025

सृजन के पिता सुखेन कुंडू सिविक वॉलंटियर के रूप में कार्यरत हैं, जबकि माता रिम्पा कुंडू गृहिणी हैं। उन्होंने बताया कि बचपन से ही सृजन की ग्रहण क्षमता अन्य बच्चों की तुलना में कहीं अधिक थी। उसकी प्रतिभा को देखते हुए परिवार ने उसके विभिन्न प्रस्तुतीकरण के वीडियो तैयार कर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के लिए भेजे। विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन के उपरांत उसकी योग्यता को मान्यता देते हुए वर्ष 2026 के रिकॉर्ड में उसका नाम शामिल किया गया।

सृजन की इस उपलब्धि के बाद हरिपुर गांव में उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोगों, शिक्षकों तथा समाज के विभिन्न वर्गों ने इस नन्ही प्रतिभा को शुभकामनाएं देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। माता-पिता का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि सृजन को संस्कारवान, शिक्षित और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिक बनाना है।

सृजन कुंडू की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि परिवार का उचित मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और सकारात्मक वातावरण मिले तो प्रतिभा किसी आयु की मोहताज नहीं होती। उसकी उपलब्धि आज असंख्य अभिभावकों और बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

Leave a Comment

Leave a Comment

[democracy id="1"]

Share Market

Also Read This

Gold & Silver Price

Our Visitor

0 4 1 5 0 4
Users Today : 5
Users Yesterday : 40