दुर्गापुर : शनिवार को दुर्गापुर इस्पात संयंत्र (डीएसपी) में हुए एक दर्दनाक औद्योगिक हादसे ने श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए। ब्लास्ट फर्नेस इकाई में कार्यरत एक ठेका श्रमिक की ड्यूटी के दौरान दुर्घटनावश पिघले हुए लोहे की चपेट में आने से मृत्यु हो गई। घटना के बाद संयंत्र परिसर में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया। मृतक के सहकर्मियों तथा अन्य ठेका श्रमिकों ने मृतक के परिवार को समुचित मुआवजा, आश्रित को स्थायी रोजगार तथा दुर्घटना की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
मृतक की पहचान 26 वर्षीय शेख शहीदुल के रूप में हुई है, जो आरती गांव के निवासी थे और ठेका श्रमिक के रूप में संयंत्र में कार्यरत थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शुक्रवार देर रात ब्लास्ट फर्नेस इकाई में कार्य के दौरान वह गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गए। सहकर्मियों ने तत्काल उन्हें बचाने का प्रयास किया तथा उपचार की व्यवस्था की, किंतु चिकित्सकों के सभी प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
घटना के बाद बड़ी संख्या में श्रमिक संयंत्र परिसर में एकत्र हो गए और सुरक्षा मानकों को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि भारी जोखिम वाले औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका आरोप था कि यदि सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी व्यवस्था अधिक प्रभावी होती, तो संभवतः इस प्रकार की दुर्घटना टाली जा सकती थी।

इस बीच कांग्रेस के पश्चिम बर्दवान जिला अध्यक्ष देवेश चक्रवर्ती ने भी घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कारखाना प्रबंधन से जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ब्लास्ट फर्नेस जैसी संवेदनशील इकाइयों में लगातार दुर्घटनाओं की खबरें चिंता का विषय हैं। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुरक्षा उपाय लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने मृतक के परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता प्रदान करने तथा परिवार के एक योग्य सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराने की भी मांग की। उनके अनुसार, किसी भी औद्योगिक संस्थान की पहली जिम्मेदारी अपने श्रमिकों के जीवन और सुरक्षा की रक्षा करना है।
संयंत्र प्रबंधन की ओर से बताया गया कि दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच प्रारंभ कर दी गई है। संबंधित अधिकारियों को घटनास्थल का निरीक्षण कर सभी परिस्थितियों का परीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में यह भी देखा जाएगा कि सुरक्षा मानकों का पालन पूरी तरह किया गया था या नहीं तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इस दुखद घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का वातावरण है। श्रमिक संगठनों ने मांग की है कि जोखिमपूर्ण कार्यस्थलों पर सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, नियमित प्रशिक्षण, सतत निगरानी तथा आपातकालीन बचाव प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रत्येक उद्योग की सर्वोच्च जिम्मेदारी होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

















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